
पूर्वी दिल्ली में संचालित एक ओपन माइक स्थल और सांस्कृतिक मंच से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिसने स्थानीय युवा कला मंचों में छात्रों की सुरक्षा, शोषण और गैर-कानूनी गतिविधियों को लेकर गहरी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
प्रभावित युवा कलाकारों और इंटर्न्स द्वारा की गई शिकायतों और रिपोर्टों के अनुसार, RPW और दरिया-ए-सुखन से जुड़े व्यक्ति—मुख्य रूप से जुबैर अहमद और उनके कुछ सहयोगी—मंच, प्रसिद्धि और मार्गदर्शन देने के बहाने उभरते कवियों, कलाकारों और छात्रों को निशाना बनाने का आरोप झेल रहे हैं।
आरोपों का स्वरूप
पीड़ित युवाओं से प्राप्त शिकायतों में कथित दुर्व्यवहार, शोषण और हेरफेर के पैटर्न का विवरण दिया गया है। मुख्य आरोपों में शामिल हैं:
भ्रामक भर्ती और प्रलोभन: उभरते कलाकारों, युवा कवियों और इंटर्न्स को स्टूडियो में आकर्षित करने के लिए मंच देने, प्रसिद्धि दिलाने, वित्तीय सहायता और रहने की व्यवस्था का वादा करना।
नशीले पदार्थों का सेवन और आपूर्ति: एक ऐसा माहौल चलाना जहां अवैध नशीले पदार्थों का सेवन होता हो, और कथित तौर पर युवाओं व छात्रों को हेरफेर, दबाव और लत का शिकार बनाने के लिए ड्रग्स का उपयोग करना।
शोषण और ब्लैकमेल: परिसर में लाने के बाद कमजोर और असहाय प्रतिभागियों को गंभीर व्यक्तिगत शोषण, वित्तीय वसूली और ब्लैकमेल का शिकार बनाने के आरोप।
जबरन धर्म परिवर्तन और दबाव: संकट या नशीले पदार्थों पर निर्भरता का सामना कर रहे युवाओं पर धर्म परिवर्तन और अनुचित दबाव बनाने के गंभीर दावे।
सरकार और पुलिस प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की अपील
इन परेशान करने वाली रिपोर्टों के आलोक में, सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों (पुलिस प्रशासन) से एक सख्त और व्यापक जांच शुरू करने की औपचारिक मांग और तत्काल अपील की गई है। सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और चिंतित नागरिकों का कहना है कि साहित्य और कला (अदब) के पवित्र नाम पर इस प्रकार की अवैध गतिविधियों और शोषण को पनपने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
छात्रों और युवा शायरों के नाम अपील
सभी छात्रों, युवा शायरों और उभरते कलाकारों से निडर रहने और एकजुट होकर आवाज उठाने की सीधी अपील की जा रही है:
सार्वजनिक अपील:
प्रभावित युवाओं और कलाकारों से आग्रह किया जाता है कि वे किसी भी धमकी या डर के आगे न झुकें, बल्कि सामने आकर संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें और अपनी आपबीती बताएं। इन हरकतों को उजागर करना कला जगत की सुरक्षा और देशभर की युवा प्रतिभाओं को बचाने के लिए बेहद जरूरी है।
स्थान और स्टूडियो का पता
इन गतिविधियों का केंद्र पूर्वी दिल्ली में स्थित एक ओपन माइक स्टूडियो बताया जा रहा है:
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के सांस्कृतिक मंचों, साहित्यिक समूहों और ओपन माइक समुदायों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। युवा कलाकारों और अभिभावकों से अनुरोध है कि वे किसी भी गैर-सत्यापित रचनात्मक मंच से जुड़ने से पहले उसके आयोजकों की विश्वसनीयता और सुरक्षा रिकॉर्ड की अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर लें।
शिकायतों में लगाए गए प्रमुख आरोप
प्राप्त शिकायतों के अनुसार, कुछ युवाओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें साहित्यिक और सांस्कृतिक मंच उपलब्ध कराने, सोशल मीडिया पर पहचान दिलाने, आर्थिक सहायता तथा रहने की व्यवस्था जैसे वादों के माध्यम से आकर्षित किया गया। बाद में परिस्थितियां बदलने पर कथित रूप से उन पर दबाव बनाया गया और उनका विभिन्न प्रकार से शोषण किया गया।
कुछ शिकायतों में यह भी दावा किया गया है कि परिसर में कथित रूप से नशीले पदार्थों का सेवन कराया जाता था अथवा ऐसा वातावरण बनाया जाता था, जिससे युवा कलाकार प्रभावित होकर मानसिक और सामाजिक रूप से कमजोर स्थिति में पहुंच जाएं। हालांकि इन आरोपों की भी अभी तक किसी सरकारी एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में आर्थिक वसूली, ब्लैकमेल और निजी जानकारियों का दुरुपयोग करने जैसी घटनाएं सामने आईं। कुछ शिकायतों में युवाओं पर कथित रूप से धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। इन दावों की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठ रही है।
निष्पक्ष जांच की मांग
मामले को लेकर सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े कुछ लोगों और चिंतित नागरिकों ने सरकार तथा पुलिस प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
उनका यह भी मानना है कि साहित्य, कविता और कला जैसे रचनात्मक मंच युवाओं को अभिव्यक्ति का सुरक्षित वातावरण देने के लिए होते हैं। यदि ऐसे मंचों का दुरुपयोग किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों या शोषण के लिए किया जाता है, तो यह पूरे सांस्कृतिक समुदाय के लिए चिंता का विषय है।
युवा कलाकारों और अभिभावकों से अपील
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने युवा कलाकारों, छात्रों और उनके अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी नए साहित्यिक या सांस्कृतिक मंच से जुड़ने से पहले उसकी विश्वसनीयता, आयोजकों की पृष्ठभूमि और सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
यदि किसी व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार, उत्पीड़न, धमकी या शोषण होता है, तो उसे चुप रहने के बजाय संबंधित पुलिस, महिला आयोग अथवा अन्य सक्षम अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज करानी चाहिए। विशेषज्ञों का भी मानना है कि समय पर शिकायत दर्ज कराने से जांच प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है। हालांकि संबंधित स्थान और वहां संचालित गतिविधियों के संबंध में सक्षम एजेंसियों द्वारा अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है।
निष्कर्ष
यह मामला केवल एक संस्था या कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सभी रचनात्मक मंचों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है जहां बड़ी संख्या में युवा अपने सपनों और प्रतिभा के साथ पहुंचते हैं। कला और साहित्य का उद्देश्य सुरक्षित, सम्मानजनक और प्रेरणादायक वातावरण उपलब्ध कराना है।
फिलहाल सबसे आवश्यक है कि संबंधित एजेंसियां सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच करें, सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दें और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें। जांच पूरी होने तक किसी भी आरोप को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा, लेकिन यदि आरोप सही सिद्ध होते हैं तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होना भी उतना ही आवश्यक है। इससे युवा कलाकारों का विश्वास कायम रहेगा और सांस्कृतिक मंचों की गरिमा भी सुरक्षित रह सकेगी।
(अस्वीकरण: इस रिपोर्ट में वर्णित आरोप शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए दावों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
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विनय श्रीवास्तव
लेखक | ब्लॉगर | स्वतंत्र पत्रकार
विनय श्रीवास्तव एक प्रतिबद्ध लेखक, ब्लॉगर एवं स्वतंत्र पत्रकार हैं, जो राष्ट्रीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, समसामयिक विषयों और जनजीवन से जुड़े मुद्दों पर गहन शोध-आधारित एवं विश्लेषणात्मक लेखन के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी लेखनी तथ्य, संतुलन और सामाजिक उत्तरदायित्व की मजबूत आधारशिला पर आधारित है।
पिछले एक दशक से अधिक समय से उनके लेख विभिन्न राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय समाचार पत्रों, पत्रिकाओं तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं। उन्होंने भारतीय राजनीति, शासन-प्रशासन, सामाजिक परिवर्तन, ग्रामीण भारत, युवा चुनौतियाँ, सांस्कृतिक विमर्श और समकालीन राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर एवं विचारोत्तेजक लेखन किया है।
विनय श्रीवास्तव का मानना है कि लेखन केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का साधन और बौद्धिक जिम्मेदारी का दायित्व है। वे अपने लेखों के माध्यम से तथ्यपरक विश्लेषण, स्वस्थ वैचारिक संवाद और राष्ट्रहित की दृष्टि को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि पाठकों में विवेक, जागरूकता और विचारशीलता को सशक्त बनाना है।
वर्ष 2026 में उनकी पहली पुस्तक “मन-मोदी” प्रकाशित हुई, जिसका विमोचन नई दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में किया गया। यह पुस्तक भारत के दो प्रधानमंत्रियों—डॉ. मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी—के नेतृत्व काल का सकारात्मक, तथ्याधारित एवं तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें दोनों कार्यकालों की नीतियों, निर्णयों, उपलब्धियों तथा राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उनके प्रभाव का संतुलित अध्ययन किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि समकालीन भारतीय राजनीति को समझने हेतु एक निष्पक्ष, रचनात्मक और विचारपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है।
साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले विनय श्रीवास्तव ने संघर्ष, अध्ययन और निरंतर लेखन के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वे सत्य, विवेक और सामाजिक चेतना को केंद्र में रखकर लेखन करते हैं तथा राष्ट्र, समाज और विचार की सकारात्मक दिशा में निरंतर योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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