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सांस्कृतिक पुनर्जागरण: ‘ट्रियो सेट ऑफ़ थ्री आर्ट्स’ ने मुंबई में पेश की कव्वाली, सूफी और बॉलीवुड की एक आध्यात्मिक शाम

​मुंबई के संगीत प्रेमियों को विरासत के एक अविस्मरणीय उत्सव का अनुभव करने का अवसर मिला, जब ‘ट्रियो सेट ऑफ़ थ्री आर्ट्स’ ने प्रतिष्ठित साबरी ब्रदर्स के साथ “सुर, शब्द और शख्सियत” कार्यक्रम का आयोजन किया। जनता की भारी मांग को ध्यान में रखते हुए, संस्था ने शास्त्रीय भक्ति, कविता और गायकी की कलात्मकता का एक असाधारण प्रदर्शन प्रस्तुत किया।

​जब उस्ताद जोड़ी ने कॉन्सर्ट की शुरुआत की, तो भवन सांस्कृतिक केंद्र का सभागार आध्यात्मिक ऊर्जा से गूंज उठा। उनके द्वारा प्रस्तुत कालजयी रचनाओं—जैसे ‘अल्लाह हू’, ‘छाप तिलक’, ‘मेरा पिया घर आया’, ‘चढ़ता सूरज’, ‘दमादम मस्त कलंदर’ और ‘भर दो झोली’—पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं और साथ में सुर मिलाया। कलाकारों और हर उम्र के दर्शकों के बीच के इस जीवंत संवाद ने प्रामाणिक कव्वाली की सर्वकालिक अपील को एक बार फिर साबित कर दिया।

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​इस सितारों से सजी शाम में मनोरंजन और सांस्कृतिक जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। उपस्थित प्रमुख अतिथियों में असलम लश्करिया, वसीम लश्करिया, दिलीप सेन, डब्बू मलिक, अहसान कुरैशी, सुनील दर्शन, राजीव वालिया, रहमान नौशाद, महबूब, कुलदीप सिंह, कंवलजीत सिंह, मालती जोशी, अश्विन कौशल, ज़रार, रोहन कपूर, कुमार, कुमार गुरु मिश्रा, सैफ हसन, नासिर, इम्तियाज जलील, अंदलीब सुल्तानपुरी, हाफिज बेग, बाबा चौधरी, कशिश वारसी, वसीम आर. खान, मेराज हैदर, जसविंदर सिंह, लिलीपुट फारुकी, अवतार गिल, आनंद राज आनंद, महालक्ष्मी अय्यर, शाहिद रफी, संदेश नाइक, शंकर सचदेवा, चंदन दास, नादिरा बब्बर, नीरज कुमार मिश्रा, फ़ज़लू रहमान अंसारी और कुलदीप सिंह मल्होत्रा शामिल थे।

​इस ऐतिहासिक आयोजन पर विचार व्यक्त करते हुए, ‘ट्रियो set ऑफ़ थ्री आर्ट्स’ की प्रबंध निदेशक (MD) शीबा लतीफ़ ने कहा:

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​”साबरी ब्रदर्स को मुंबई के उत्साही दर्शकों के सामने फिर से पेश करना हमारी कलात्मक जड़ों के सम्मान के मिशन को पूरा करता है। ‘सुर, शब्द और शख्सियत’ सिर्फ एक लाइव कार्यक्रम नहीं है—यह हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत को एक हार्दिक श्रद्धांजलि है। पूरे सभागार को भक्ति और संगीत के सुरों में एकजुट देखना ही इस आयोजन की असली सफलता है।”

​संस्था के चेयरमैन अलतमश अब्बास ने भी कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रति संगठन के दृष्टिकोण को सुदृढ़ किया।

​पारंपरिक आध्यात्मिक कला रूपों को आधुनिक आयोजन उत्कृष्टता के साथ सहजता से जोड़कर, ‘ट्रियो सेट ऑफ़ थ्री आर्ट्स’ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे पौराणिक विरासत और आधुनिक दर्शकों के बीच एक खूबसूरत पुल का निर्माण कर रहे हैं, जिससे हमारी शास्त्रीय परंपराएं आने वाली पीढ़ियों के लिए भी समृद्ध होती रहें।

✍️विनय श्रीवास्तव
लेखक | ब्लॉगर | स्वतंत्र पत्रकार

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