समाज में बढ़ती संवेदनहीनता: क्या हम इतने पत्थरदिल हो गए हैं कि नौकरी, लालच और अहंकार के लिए माँ-बाप भी बोझ लगने लगे?
समाज का वास्तविक विकास ऊँची इमारतों, चौड़ी सड़कों और आधुनिक तकनीक से नहीं मापा जाता। किसी सभ्यता की सबसे बड़ी पहचान यह होती है कि वह अपने सबसे कमजोर लोगों—बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों—के साथ कैसा व्यवहार करती है। दुर्भाग्य से आज भारत का समाज ऐसी घटनाओं का गवाह बन रहा है, जो केवल कानून तोड़ने […]





