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समाज और सच्चाई

विनय श्रीवास्तव लेखक | ब्लॉगर | स्वतंत्र पत्रकार
समाज और सच्चाई

मर न सके हम देश की खातिर, लेकिन जी तो सकते हैं

देश के लिए मरना ही नहीं, देश के लिए जीना भी सीखें स्वतंत्रता दिवस विशेष क्या देशभक्ति सिर्फ सीमा पर शहीद होने का नाम है? या फिर हर भारतीय अपने रोज़मर्रा के जीवन में भी एक सच्चा देशभक्त बन सकता है? अगस्त का महीना आते ही भारत का वातावरण जैसे अचानक तिरंगे के रंगों में […]

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समाज और सच्चाई

पद रहित सेवा ही विकास का मूलमंत्र, जिसे जयपुर के ये समाजसेवी अपने कर्म से कर रहे हैं साकार

“वतन की मिट्टी से बढ़कर कोई तीर्थ नहीं, तिरंगे से बढ़कर कोई सम्मान नहीं और देश के लिए कुछ कर गुजरने से बढ़कर कोई गौरव नहीं।” स्वतंत्रता दिवस केवल उस आजादी का उत्सव नहीं है, जो हमें वर्षों के संघर्ष और असंख्य बलिदानों के बाद मिली, बल्कि यह अवसर हमें यह सोचने का भी देता

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समाज और सच्चाई

दोस्ती ऐसी हो कि दोस्त कहे—“तू क्यों घबराता है, मैं हूँ ना!”

कृष्ण और सुदामा की मित्रता की कल्पना आज के दौर में शायद मुश्किल ही नहीं, लगभग असंभव सी लगती है। वह दोस्ती किसी स्वार्थ, जरूरत या मतलब की जमीन पर खड़ी नहीं थी। वहां न अमीरी-गरीबी का फर्क था, न राजा और साधारण मित्र का अहसास। सुदामा के पास देने के लिए शायद कुछ नहीं

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MBBS ही मंज़िल नहीं, मेडिकल साइंस में सफलता के अनेक सुनहरे रास्ते हैं
राजनीति, समाज और सच्चाई

NEET Result 2026: MBBS नहीं मिला तो निराश क्यों ? मेडिकल साइंस में सफलता के 6 बेहतरीन करियर विकल्प जानिये

“जीवन में कई बार मंज़िल नहीं बदलती, केवल वहाँ तक पहुँचने का रास्ता बदल जाता है। इसलिए किसी एक परीक्षा का परिणाम आपके सपनों का अंतिम फैसला नहीं हो सकता।” करीब 22 लाख विद्यार्थियों ने इस वर्ष NEET-UG परीक्षा दी, लेकिन पूरे देश में MBBS की लगभग 1.25 लाख सीटें ही उपलब्ध हैं। यानी लाखों

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समाज में बढ़ती संवेदनहीनता
समाज और सच्चाई

समाज में बढ़ती संवेदनहीनता: क्या हम इतने पत्थरदिल हो गए हैं कि नौकरी, लालच और अहंकार के लिए माँ-बाप भी बोझ लगने लगे?

समाज का वास्तविक विकास ऊँची इमारतों, चौड़ी सड़कों और आधुनिक तकनीक से नहीं मापा जाता। किसी सभ्यता की सबसे बड़ी पहचान यह होती है कि वह अपने सबसे कमजोर लोगों—बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों—के साथ कैसा व्यवहार करती है। दुर्भाग्य से आज भारत का समाज ऐसी घटनाओं का गवाह बन रहा है, जो केवल कानून तोड़ने

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केतन हत्याकांड पर आधारित सांकेतिक चित्र, रिश्तों में बढ़ती हिंसा और सामाजिक चिंता
समाज और सच्चाई

केतन हत्याकांड: रिश्तों की बागडोर और हमारी ज़िम्मेदारी — क्या हिंसा नई पीढ़ी के भविष्य को निगल रही है?

रिश्ते केवल दो व्यक्तियों का साथ नहीं होते, बल्कि परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों की नींव भी होते हैं। पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका या जीवनसाथी के बीच विश्वास, सम्मान और संवाद जितना मजबूत होगा, समाज उतना ही स्वस्थ और सुरक्षित बनेगा। लेकिन हाल के वर्षों में जिस प्रकार रिश्तों के नाम पर हत्या, आत्महत्या, धोखा और

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