BREAKING UPDATES
► NEET Result 2026: MBBS नहीं मिला तो निराश क्यों ? मेडिकल साइंस में सफलता के 6 बेहतरीन करियर विकल्प जानिये► यास्तिका भाटिया : भाग–2► यास्तिका भाटिया : भाग–1► राष्ट्रभक्ति का महापर्व स्वतंत्रता दिवस पर : ‘मेरा भारत महान’ कार्यक्रम में होगा भारत वैभव सम्मान-2026 का भव्य आयोजन► शब्दों के साधक, संघर्ष, शुचिता और साहित्य की अनवरत साधना: श्री गिरीश पंकज जी से विशेष बातचीत► समाज में बढ़ती संवेदनहीनता: क्या हम इतने पत्थरदिल हो गए हैं कि नौकरी, लालच और अहंकार के लिए माँ-बाप भी बोझ लगने लगे?► युवाओं की हालत: आज की पीढ़ी का द्वंद्व और अनिश्चितता का सच► क्या मेडिकल कॉलेज शिक्षा के मंदिर हैं या छात्रों की प्रताड़ना के केंद्र? MBBS छात्रों के गंभीर आरोपों ने खड़े किए बड़े सवाल► क्या विचारों में राम और बुद्धि में कृष्ण ही आज के समय में सफल जीवन जीने की सबसे बड़ी साधना है?► आमिर खान की तीसरी शादी-भाग 2 : “मेरी ज़िंदगी, मेरी मर्ज़ी” बनाम “सार्वजनिक जीवन, सार्वजनिक जिम्मेदारी”► NEET Result 2026: MBBS नहीं मिला तो निराश क्यों ? मेडिकल साइंस में सफलता के 6 बेहतरीन करियर विकल्प जानिये► यास्तिका भाटिया : भाग–2► यास्तिका भाटिया : भाग–1► राष्ट्रभक्ति का महापर्व स्वतंत्रता दिवस पर : ‘मेरा भारत महान’ कार्यक्रम में होगा भारत वैभव सम्मान-2026 का भव्य आयोजन► शब्दों के साधक, संघर्ष, शुचिता और साहित्य की अनवरत साधना: श्री गिरीश पंकज जी से विशेष बातचीत► समाज में बढ़ती संवेदनहीनता: क्या हम इतने पत्थरदिल हो गए हैं कि नौकरी, लालच और अहंकार के लिए माँ-बाप भी बोझ लगने लगे?► युवाओं की हालत: आज की पीढ़ी का द्वंद्व और अनिश्चितता का सच► क्या मेडिकल कॉलेज शिक्षा के मंदिर हैं या छात्रों की प्रताड़ना के केंद्र? MBBS छात्रों के गंभीर आरोपों ने खड़े किए बड़े सवाल► क्या विचारों में राम और बुद्धि में कृष्ण ही आज के समय में सफल जीवन जीने की सबसे बड़ी साधना है?► आमिर खान की तीसरी शादी-भाग 2 : “मेरी ज़िंदगी, मेरी मर्ज़ी” बनाम “सार्वजनिक जीवन, सार्वजनिक जिम्मेदारी”► NEET Result 2026: MBBS नहीं मिला तो निराश क्यों ? मेडिकल साइंस में सफलता के 6 बेहतरीन करियर विकल्प जानिये► यास्तिका भाटिया : भाग–2► यास्तिका भाटिया : भाग–1► राष्ट्रभक्ति का महापर्व स्वतंत्रता दिवस पर : ‘मेरा भारत महान’ कार्यक्रम में होगा भारत वैभव सम्मान-2026 का भव्य आयोजन► शब्दों के साधक, संघर्ष, शुचिता और साहित्य की अनवरत साधना: श्री गिरीश पंकज जी से विशेष बातचीत► समाज में बढ़ती संवेदनहीनता: क्या हम इतने पत्थरदिल हो गए हैं कि नौकरी, लालच और अहंकार के लिए माँ-बाप भी बोझ लगने लगे?► युवाओं की हालत: आज की पीढ़ी का द्वंद्व और अनिश्चितता का सच► क्या मेडिकल कॉलेज शिक्षा के मंदिर हैं या छात्रों की प्रताड़ना के केंद्र? MBBS छात्रों के गंभीर आरोपों ने खड़े किए बड़े सवाल► क्या विचारों में राम और बुद्धि में कृष्ण ही आज के समय में सफल जीवन जीने की सबसे बड़ी साधना है?► आमिर खान की तीसरी शादी-भाग 2 : “मेरी ज़िंदगी, मेरी मर्ज़ी” बनाम “सार्वजनिक जीवन, सार्वजनिक जिम्मेदारी”

क्या मेडिकल कॉलेज शिक्षा के मंदिर हैं या छात्रों की प्रताड़ना के केंद्र? MBBS छात्रों के गंभीर आरोपों ने खड़े किए बड़े सवाल

MBBS छात्रों का फूटा आक्रोश: दादा के निधन पर भी छुट्टी नहीं, हॉस्टल बना ‘जेल’, आखिर कब जागेगा सिस्टम?

लेखक: विनय श्रीवास्तव

देश में डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप माना जाता है। लेकिन एक सवाल आज पूरे समाज के सामने खड़ा है—जो संस्थान भविष्य के डॉक्टर तैयार कर रहे हैं, यदि वहीं छात्रों के साथ अमानवीय व्यवहार हो, उनकी भावनाओं को कुचल दिया जाए, मानसिक प्रताड़ना दी जाए और आवाज उठाने पर भविष्य बर्बाद करने की धमकी मिले, तो ऐसे संस्थान आखिर किस प्रकार के डॉक्टर तैयार करेंगे?

WhatsApp पर जुड़ें
राजनीति, समाज, अध्यात्म और प्रेरणा — रोज़ नई दृष्टि
✅ अभी Follow करें

राजधानी लखनऊ के बंथरा स्थित प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (Prasad Institute of Medical Sciences) में सामने आए घटनाक्रम ने पूरे प्रदेश ही नहीं, देश की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। बुधवार को सैकड़ों एमबीबीएस छात्रों का धैर्य टूट गया। वे सड़क पर उतर आए, लखनऊ-कानपुर हाईवे जाम कर दिया और “हमें चाहिए आज़ादी” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।

यह प्रदर्शन केवल सड़क जाम करने का मामला नहीं था, बल्कि उन दबे हुए दर्दों का विस्फोट था जिन्हें छात्र लंबे समय से अपने भीतर दबाए हुए थे।

क्या अनुशासन के नाम पर छात्रों की संवेदनाओं का गला घोंटा जा रहा है?

छात्रों के आरोप केवल खराब भोजन या हॉस्टल की अव्यवस्था तक सीमित नहीं हैं। सबसे पीड़ादायक आरोप यह है कि एक छात्र के दादा जी के निधन के बाद भी उसे अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए छुट्टी नहीं दी गई।

यदि यह आरोप सत्य है, तो यह केवल प्रशासनिक कठोरता नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की निर्मम हत्या जैसा प्रतीत होता है।

कल्पना कीजिए उस छात्र की मानसिक स्थिति, जो अपने परिवार के सबसे कठिन समय में अपने प्रियजन को अंतिम विदाई तक न दे सका। क्या कोई भी नियम, कोई भी अनुशासन और कोई भी संस्थागत व्यवस्था इतनी कठोर हो सकती है कि वह एक छात्र से उसका अंतिम पारिवारिक दायित्व भी छीन ले?

शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं होता; शिक्षा मनुष्य को संवेदनशील बनाती है। यदि कोई संस्थान अपने ही विद्यार्थियों की भावनाओं को समझने में असफल हो जाए, तो उसे आत्ममंथन की आवश्यकता है।

‘हॉस्टल नहीं, जेल है’—जब लाखों की फीस के बदले मिले भय, गंदगी और अपमान

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कॉलेज परिसर को “हॉस्टल नहीं, जेल” बताया। यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि उस मानसिक पीड़ा का प्रतीक है जिसे वे वर्षों से झेलने का दावा कर रहे हैं।

छात्रों के अनुसार—

  • बिना अनुमति कॉलेज परिसर से बाहर जाने की स्वतंत्रता नहीं।
  • पारिवारिक आपातकाल में भी छुट्टी नहीं।
  • लाखों रुपये फीस के बावजूद निम्नस्तरीय भोजन।
  • पीने के स्वच्छ पानी का अभाव।
  • दो छात्रों वाले कमरे में तीन-तीन छात्रों को ठूंसकर रखना।
  • हॉस्टल और परिसर में गंदगी का अंबार।
  • भीषण गर्मी में भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव।

यदि ये आरोप सही हैं, तो यह केवल कुप्रबंधन नहीं, बल्कि छात्रों के स्वास्थ्य और सम्मान के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

मेडिकल छात्र स्वयं भविष्य में मरीजों का इलाज करेंगे। लेकिन यदि आज उनकी अपनी शारीरिक और मानसिक स्थिति की उपेक्षा की जाएगी, तो इसका प्रभाव उनके व्यक्तित्व, अध्ययन और भविष्य की चिकित्सा सेवाओं पर भी पड़ सकता है।

आवाज़ उठाओ तो ‘करियर बर्बाद’ करने की धमकी? क्या यही है शिक्षा का वातावरण?

किसी भी लोकतांत्रिक संस्थान की सबसे बड़ी पहचान होती है—संवाद।

लेकिन छात्रों का आरोप है कि जब भी वे अपनी समस्याओं को उठाते हैं, तो उन्हें समाधान नहीं, बल्कि करियर बर्बाद करने की धमकी दी जाती है।

WhatsApp पर जुड़ें
राजनीति, समाज, अध्यात्म और प्रेरणा — रोज़ नई दृष्टि
✅ अभी Follow करें

यदि किसी शैक्षणिक संस्थान में भय का ऐसा वातावरण बना दिया जाए कि छात्र अपनी बात रखने से डरने लगें, तो यह शिक्षा नहीं, दमन का वातावरण कहलाएगा।

इसी के साथ छात्रों ने कॉलेज के डीन डॉ. रतन श्रीवास्तव पर छात्राओं के साथ अभद्र एवं अमर्यादित भाषा के प्रयोग का भी गंभीर आरोप लगाया है।

ये आरोप अत्यंत गंभीर हैं। इनकी निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच आवश्यक है। जांच पूरी होने तक इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। लेकिन इतने बड़े स्तर पर छात्रों का सड़क पर उतरना यह संकेत अवश्य देता है कि मामला सामान्य असंतोष से कहीं अधिक गंभीर है।

यह भी पढ़ें 👇

आमिर खान की तीसरी शादी-भाग 2 : “मेरी ज़िंदगी, मेरी मर्ज़ी” बनाम “सार्वजनिक जीवन, सार्वजनिक जिम्मेदारी”

अब केवल आश्वासन नहीं, निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की आवश्यकता

हाईवे जाम की सूचना मिलते ही बंथरा थाना पुलिस तथा एसीपी कृष्णा नगर अभिषेक कुमार पाण्डेय मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्रों ने स्पष्ट कहा कि जब तक कॉलेज के प्रिंसिपल और एचआर स्वयं आकर उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं देंगे, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा।

यह स्थिति केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है। यह उच्च शिक्षा, छात्र अधिकारों और संस्थागत जवाबदेही का विषय है।

यदि छात्रों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित संस्थान के खिलाफ कठोर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर आरोप असत्य या बढ़ा-चढ़ाकर लगाए गए हैं, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लेकिन किसी भी स्थिति में सच्चाई सामने आना आवश्यक है।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC), संबंधित विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य शिक्षा विभाग को इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच करानी चाहिए। यदि जरूरत हो तो एक हेल्पलाइन और शिकायत तंत्र भी विकसित किया जाना चाहिए, जहां मेडिकल छात्र बिना किसी डर के अपनी समस्याएं दर्ज करा सकें।

देश को ऐसे डॉक्टर चाहिए जो संवेदनशील हों, मानवीय हों और समाज की सेवा करें। लेकिन यदि मेडिकल कॉलेजों में ही संवेदनाओं का दम घुटने लगे, तो यह केवल छात्रों की नहीं, पूरे समाज की चिंता का विषय है।

अनुशासन आवश्यक है, लेकिन अनुशासन के नाम पर मानवीय संवेदनाओं का गला घोंटना किसी भी सभ्य समाज की पहचान नहीं हो सकता। शिक्षा संस्थान भय से नहीं, विश्वास, सम्मान और संवाद से चलते हैं। यदि छात्रों को अपनी बात कहने के लिए सड़क पर उतरना पड़े, तो यह केवल छात्रों की नहीं, पूरी शिक्षा व्यवस्था की विफलता मानी जाएगी।

यह भी पढ़ें 👇

अपने बिज़नेस को बढ़ाएं – हमारे साथ विज्ञापन करें | Grow Your Business – Advertise With Us

1 thought on “क्या मेडिकल कॉलेज शिक्षा के मंदिर हैं या छात्रों की प्रताड़ना के केंद्र? MBBS छात्रों के गंभीर आरोपों ने खड़े किए बड़े सवाल”

  1. Pingback: यास्तिका भाटिया : भाग–1

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top