त्योहारों पर आंदोलन की आड़ में सियासत का तांडव! गरीब की रोटी और व्यापारियों की रोजी-रोटी पर चोट करने वालों को जनता कब तक सहे?
त्योहारों का मौसम है। बाजारों में रौनक होनी चाहिए, दुकानदारों के चेहरों पर उम्मीद दिखनी चाहिए, घरों में खुशियां पहुंचनी चाहिए और मेहनतकश परिवारों को अपनी सालभर की मेहनत का फल मिलना चाहिए। लेकिन जब राजनीति की महत्वाकांक्षा जनता की जरूरतों पर भारी पड़ने लगे, विरोध प्रदर्शन के नाम पर सड़कों पर जाम लगने लगे,
