ललित निबंध-“साहित्यिक पत्रकारिता की शब्द-संस्कृति”
1905 के आसपास प्रयाग से जब ‘सरस्वती’ के नए अंक प्रकाशित होकर आते थे , तो साहित्य में रुचि रखने वाले अनेक पाठक उसकी प्रतीक्षा उसी उत्सुकता से करते थे, जैसे किसान पहली वर्षा की प्रतीक्षा करता है।वह पत्रिका भाषा का संस्कार, विचार का अनुशासन और समाज का नया बोध लेकर आती थी। वर्षों बाद […]
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