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साहित्य संग्रह

हिंदी साहित्य, कविता, कहानी, संस्मरण और रचनात्मक लेखों का संग्रह। पढ़ें साहित्य से जुड़े विविध आलेख और रचनाएँ।

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जेन जी की LOL भाषा और हमारी उलझन!

“जीनीयस जनरेशन की ‘लोल’ भाषा” आज के जेन जी यानी नई पीढ़ी ने जिंदगी को इतना तेज कर दिया है कि अब शब्द भी हांफने लगे हैं। पहले लोग चिट्ठियां लिखते थे, फिर एसएमएस आया और अब तो लगता है कि अक्षरों की छुट्टी कर दी गई है। दो पीढ़ियों के बीच संवाद का अंतर

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प्रेरक व्यक्तित्व, साहित्य संग्रह

एक सदी की ‘वीणा’, एक साधक का जीवन और एक आत्मीय संवाद

विनय श्रीवास्तव से राकेश शर्मा जी की बातचीत में साहित्य, संघर्ष और शब्दों की अनवरत साधना कुछ मुलाकातें केवल मुलाकातें नहीं होतीं, वे अपने पीछे एक पूरा समय, एक पूरा अनुभव और अनेक अनकही कहानियां छोड़ जाती हैं। श्री राकेश शर्मा जी से बातचीत भी कुछ ऐसी ही अनुभूति रही। सामने एक ऐसे साहित्य-साधक थे,

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भाषाएँ अनेक, साहित्य एक! भुवनेश्वर में 26-27 सितंबर को श्रीक्षेत्र राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव

श्रीक्षेत्र राष्ट्रीय साहित्य महोत्सवश्रीक्षेत्र राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव का पाँचवाँ संस्करण 26–27 सितंबर को जयदेव भवन, भुवनेश्वर में बहुभाषी कवि सम्मेलन में एक दर्जन से अधिक भारतीय भाषाओं के 100 से अधिक कवि एवं साहित्यकार होंगे शामिल भारत के श्रीक्षेत्र राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव (S.N.L.F.) का पाँचवाँ संस्करण आगामी 26 एवं 27 सितंबर को ओडिशा की राजधानी

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सांस्कृतिक पुनर्जागरण: ‘ट्रियो सेट ऑफ़ थ्री आर्ट्स’ ने मुंबई में पेश की कव्वाली, सूफी और बॉलीवुड की एक आध्यात्मिक शाम

​मुंबई के संगीत प्रेमियों को विरासत के एक अविस्मरणीय उत्सव का अनुभव करने का अवसर मिला, जब ‘ट्रियो सेट ऑफ़ थ्री आर्ट्स’ ने प्रतिष्ठित साबरी ब्रदर्स के साथ “सुर, शब्द और शख्सियत” कार्यक्रम का आयोजन किया। जनता की भारी मांग को ध्यान में रखते हुए, संस्था ने शास्त्रीय भक्ति, कविता और गायकी की कलात्मकता का

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लंदन_डायरी : चर्च में वोटिंग सेंटर और ब्रिटिश लोकतंत्र की सहजता

लंदन में रहते हुए छोटी छोटी बातें कभी कभी भारत और ब्रिटेन के लोकतांत्रिक संस्कारों के बीच बड़ा अंतर दिखा देती हैं। आज ऐसी ही एक बात ध्यान में आई (london-diary-church-polling-station-british-democracy)। यहाँ मतदान केंद्र किसी चर्च में भी बनाया जा सकता है। कल्पना कीजिए, भारत में किसी मंदिर को मतदान केंद्र बना दिया जाए। मतदान

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ललित निबंध-“साहित्यिक पत्रकारिता की शब्द-संस्कृति”

1905 के आसपास प्रयाग से जब ‘सरस्वती’ के नए अंक प्रकाशित होकर आते थे , तो साहित्य में रुचि रखने वाले अनेक पाठक उसकी प्रतीक्षा उसी उत्सुकता से करते थे, जैसे किसान पहली वर्षा की प्रतीक्षा करता है।वह पत्रिका भाषा का संस्कार, विचार का अनुशासन और समाज का नया बोध लेकर आती थी। वर्षों बाद

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