BREAKING UPDATES
► जेन जी की LOL भाषा और हमारी उलझन!► दिल्ली को बंधक बनाने की राजनीति बंद करो! जनता के अधिकारों से खिलवाड़ आखिर कब तक?► एक सदी की ‘वीणा’, एक साधक का जीवन और एक आत्मीय संवाद► मशालों की रोशनी में गूंजा शहीद भगत सिंह का संदेश, प्रताप नगर में युवाओं ने कहा—‘इंकलाब जिंदाबाद’► पितृपक्ष: जब स्मृतियों में लौट आते हैं माता-पिता, संस्कार और उनका अनंत आशीर्वाद► भाषाएँ अनेक, साहित्य एक! भुवनेश्वर में 26-27 सितंबर को श्रीक्षेत्र राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव► समय के शिल्पी, मानवता के मसीहा: कर्मयोगी कवि संदीप कपूर ‘वक़्तनाम’► आयुर्वेद की राह पर स्वस्थ जीवन की पहल► मेरी कलम, मेरी यात्रा और चौदह वर्षों का विश्वास► जनचेतना की कलम को मिला सम्मान: विनय श्रीवास्तव को ‘भारतेन्दु पत्रकारिता गौरव सम्मान-2026’► जेन जी की LOL भाषा और हमारी उलझन!► दिल्ली को बंधक बनाने की राजनीति बंद करो! जनता के अधिकारों से खिलवाड़ आखिर कब तक?► एक सदी की ‘वीणा’, एक साधक का जीवन और एक आत्मीय संवाद► मशालों की रोशनी में गूंजा शहीद भगत सिंह का संदेश, प्रताप नगर में युवाओं ने कहा—‘इंकलाब जिंदाबाद’► पितृपक्ष: जब स्मृतियों में लौट आते हैं माता-पिता, संस्कार और उनका अनंत आशीर्वाद► भाषाएँ अनेक, साहित्य एक! भुवनेश्वर में 26-27 सितंबर को श्रीक्षेत्र राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव► समय के शिल्पी, मानवता के मसीहा: कर्मयोगी कवि संदीप कपूर ‘वक़्तनाम’► आयुर्वेद की राह पर स्वस्थ जीवन की पहल► मेरी कलम, मेरी यात्रा और चौदह वर्षों का विश्वास► जनचेतना की कलम को मिला सम्मान: विनय श्रीवास्तव को ‘भारतेन्दु पत्रकारिता गौरव सम्मान-2026’► जेन जी की LOL भाषा और हमारी उलझन!► दिल्ली को बंधक बनाने की राजनीति बंद करो! जनता के अधिकारों से खिलवाड़ आखिर कब तक?► एक सदी की ‘वीणा’, एक साधक का जीवन और एक आत्मीय संवाद► मशालों की रोशनी में गूंजा शहीद भगत सिंह का संदेश, प्रताप नगर में युवाओं ने कहा—‘इंकलाब जिंदाबाद’► पितृपक्ष: जब स्मृतियों में लौट आते हैं माता-पिता, संस्कार और उनका अनंत आशीर्वाद► भाषाएँ अनेक, साहित्य एक! भुवनेश्वर में 26-27 सितंबर को श्रीक्षेत्र राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव► समय के शिल्पी, मानवता के मसीहा: कर्मयोगी कवि संदीप कपूर ‘वक़्तनाम’► आयुर्वेद की राह पर स्वस्थ जीवन की पहल► मेरी कलम, मेरी यात्रा और चौदह वर्षों का विश्वास► जनचेतना की कलम को मिला सम्मान: विनय श्रीवास्तव को ‘भारतेन्दु पत्रकारिता गौरव सम्मान-2026’

Author name: Vinay Shrivastav

विनय श्रीवास्तव लेखक | ब्लॉगर | स्वतंत्र पत्रकार विनय श्रीवास्तव एक प्रतिबद्ध लेखक, ब्लॉगर एवं स्वतंत्र पत्रकार हैं, जो राष्ट्रीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, समसामयिक विषयों और जनजीवन से जुड़े मुद्दों पर गहन शोध-आधारित एवं विश्लेषणात्मक लेखन के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी लेखनी तथ्य, संतुलन और सामाजिक उत्तरदायित्व की मजबूत आधारशिला पर आधारित है। पिछले एक दशक से अधिक समय से उनके लेख विभिन्न राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय समाचार पत्रों, पत्रिकाओं तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं। उन्होंने भारतीय राजनीति, शासन-प्रशासन, सामाजिक परिवर्तन, ग्रामीण भारत, युवा चुनौतियाँ, सांस्कृतिक विमर्श और समकालीन राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर एवं विचारोत्तेजक लेखन किया है। विनय श्रीवास्तव का मानना है कि लेखन केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का साधन और बौद्धिक जिम्मेदारी का दायित्व है। वे अपने लेखों के माध्यम से तथ्यपरक विश्लेषण, स्वस्थ वैचारिक संवाद और राष्ट्रहित की दृष्टि को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि पाठकों में विवेक, जागरूकता और विचारशीलता को सशक्त बनाना है। वर्ष 2026 में उनकी पहली पुस्तक “मन-मोदी” प्रकाशित हुई, जिसका विमोचन नई दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में किया गया। यह पुस्तक भारत के दो प्रधानमंत्रियों—डॉ. मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी—के नेतृत्व काल का सकारात्मक, तथ्याधारित एवं तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें दोनों कार्यकालों की नीतियों, निर्णयों, उपलब्धियों तथा राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उनके प्रभाव का संतुलित अध्ययन किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि समकालीन भारतीय राजनीति को समझने हेतु एक निष्पक्ष, रचनात्मक और विचारपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है। साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले विनय श्रीवास्तव ने संघर्ष, अध्ययन और निरंतर लेखन के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वे सत्य, विवेक और सामाजिक चेतना को केंद्र में रखकर लेखन करते हैं तथा राष्ट्र, समाज और विचार की सकारात्मक दिशा में निरंतर योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह पुस्तक Amazon पर उपलब्ध है: 👉 “मन-मोदी” – विनय श्रीवास्तव https://www.amazon.in/dp/B0G69QT373

साहित्य संग्रह

जेन जी की LOL भाषा और हमारी उलझन!

“जीनीयस जनरेशन की ‘लोल’ भाषा” आज के जेन जी यानी नई पीढ़ी ने जिंदगी को इतना तेज कर दिया है कि अब शब्द भी हांफने लगे हैं। पहले लोग चिट्ठियां लिखते थे, फिर एसएमएस आया और अब तो लगता है कि अक्षरों की छुट्टी कर दी गई है। दो पीढ़ियों के बीच संवाद का अंतर

जेन जी की LOL भाषा और हमारी उलझन! Read Post »

राजनीति

दिल्ली को बंधक बनाने की राजनीति बंद करो! जनता के अधिकारों से खिलवाड़ आखिर कब तक?

लोकतंत्र के नाम पर आम आदमी को जाम, आर्थिक नुकसान और परेशानी की सजा क्यों? विदेश से आकर भारत की राजनीति में हस्तक्षेप करने वालों और चुनिंदा मुद्दों पर सक्रिय रहने वाले संगठनों से भी पूछे जाने चाहिए तीखे सवाल। दिल्ली देश की राजधानी है, किसी राजनीतिक दल, यूट्यूबर या प्रदर्शनकारी संगठन की निजी जागीर

दिल्ली को बंधक बनाने की राजनीति बंद करो! जनता के अधिकारों से खिलवाड़ आखिर कब तक? Read Post »

प्रेरक व्यक्तित्व, साहित्य संग्रह

एक सदी की ‘वीणा’, एक साधक का जीवन और एक आत्मीय संवाद

विनय श्रीवास्तव से राकेश शर्मा जी की बातचीत में साहित्य, संघर्ष और शब्दों की अनवरत साधना कुछ मुलाकातें केवल मुलाकातें नहीं होतीं, वे अपने पीछे एक पूरा समय, एक पूरा अनुभव और अनेक अनकही कहानियां छोड़ जाती हैं। श्री राकेश शर्मा जी से बातचीत भी कुछ ऐसी ही अनुभूति रही। सामने एक ऐसे साहित्य-साधक थे,

एक सदी की ‘वीणा’, एक साधक का जीवन और एक आत्मीय संवाद Read Post »

राजनीति

मशालों की रोशनी में गूंजा शहीद भगत सिंह का संदेश, प्रताप नगर में युवाओं ने कहा—‘इंकलाब जिंदाबाद’

जयपुर के प्रताप नगर में अमर शहीद भगत सिंह की जयंती के अवसर पर आयोजित मशाल मार्च ने देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का ऐसा वातावरण बनाया, जिसमें हर कदम पर शहीदों के प्रति सम्मान और हर आवाज में राष्ट्रप्रेम की भावना दिखाई दी। 27 सितंबर की शाम आयोजित इस मशाल मार्च में बड़ी संख्या में

मशालों की रोशनी में गूंजा शहीद भगत सिंह का संदेश, प्रताप नगर में युवाओं ने कहा—‘इंकलाब जिंदाबाद’ Read Post »

समाज और सच्चाई

पितृपक्ष: जब स्मृतियों में लौट आते हैं माता-पिता, संस्कार और उनका अनंत आशीर्वाद

पितृपक्ष केवल कैलेंडर में आने वाले कुछ दिनों का नाम नहीं है। यह उन रिश्तों को याद करने का अवसर है, जिनकी वजह से हमारा अस्तित्व है। यह समय हमें अपनी जड़ों की ओर लौटने, अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करने और यह स्वीकार करने का अवसर देता है कि आज हम जो कुछ भी

पितृपक्ष: जब स्मृतियों में लौट आते हैं माता-पिता, संस्कार और उनका अनंत आशीर्वाद Read Post »

साहित्य संग्रह

भाषाएँ अनेक, साहित्य एक! भुवनेश्वर में 26-27 सितंबर को श्रीक्षेत्र राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव

श्रीक्षेत्र राष्ट्रीय साहित्य महोत्सवश्रीक्षेत्र राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव का पाँचवाँ संस्करण 26–27 सितंबर को जयदेव भवन, भुवनेश्वर में बहुभाषी कवि सम्मेलन में एक दर्जन से अधिक भारतीय भाषाओं के 100 से अधिक कवि एवं साहित्यकार होंगे शामिल भारत के श्रीक्षेत्र राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव (S.N.L.F.) का पाँचवाँ संस्करण आगामी 26 एवं 27 सितंबर को ओडिशा की राजधानी

भाषाएँ अनेक, साहित्य एक! भुवनेश्वर में 26-27 सितंबर को श्रीक्षेत्र राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव Read Post »

Scroll to Top