BREAKING UPDATES
► एक सदी की ‘वीणा’, एक साधक का जीवन और एक आत्मीय संवाद► मशालों की रोशनी में गूंजा शहीद भगत सिंह का संदेश, प्रताप नगर में युवाओं ने कहा—‘इंकलाब जिंदाबाद’► पितृपक्ष: जब स्मृतियों में लौट आते हैं माता-पिता, संस्कार और उनका अनंत आशीर्वाद► भाषाएँ अनेक, साहित्य एक! भुवनेश्वर में 26-27 सितंबर को श्रीक्षेत्र राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव► समय के शिल्पी, मानवता के मसीहा: कर्मयोगी कवि संदीप कपूर ‘वक़्तनाम’► आयुर्वेद की राह पर स्वस्थ जीवन की पहल► मेरी कलम, मेरी यात्रा और चौदह वर्षों का विश्वास► जनचेतना की कलम को मिला सम्मान: विनय श्रीवास्तव को ‘भारतेन्दु पत्रकारिता गौरव सम्मान-2026’► ­­शरणार्थी शिविर से संयुक्त राष्ट्र तक… फिर राष्ट्रसेवा के शिखर तक—हरदीप सिंह पुरी की वह यात्रा जो हार मानना नहीं सिखाती!► सांस्कृतिक पुनर्जागरण: ‘ट्रियो सेट ऑफ़ थ्री आर्ट्स’ ने मुंबई में पेश की कव्वाली, सूफी और बॉलीवुड की एक आध्यात्मिक शाम► एक सदी की ‘वीणा’, एक साधक का जीवन और एक आत्मीय संवाद► मशालों की रोशनी में गूंजा शहीद भगत सिंह का संदेश, प्रताप नगर में युवाओं ने कहा—‘इंकलाब जिंदाबाद’► पितृपक्ष: जब स्मृतियों में लौट आते हैं माता-पिता, संस्कार और उनका अनंत आशीर्वाद► भाषाएँ अनेक, साहित्य एक! भुवनेश्वर में 26-27 सितंबर को श्रीक्षेत्र राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव► समय के शिल्पी, मानवता के मसीहा: कर्मयोगी कवि संदीप कपूर ‘वक़्तनाम’► आयुर्वेद की राह पर स्वस्थ जीवन की पहल► मेरी कलम, मेरी यात्रा और चौदह वर्षों का विश्वास► जनचेतना की कलम को मिला सम्मान: विनय श्रीवास्तव को ‘भारतेन्दु पत्रकारिता गौरव सम्मान-2026’► ­­शरणार्थी शिविर से संयुक्त राष्ट्र तक… फिर राष्ट्रसेवा के शिखर तक—हरदीप सिंह पुरी की वह यात्रा जो हार मानना नहीं सिखाती!► सांस्कृतिक पुनर्जागरण: ‘ट्रियो सेट ऑफ़ थ्री आर्ट्स’ ने मुंबई में पेश की कव्वाली, सूफी और बॉलीवुड की एक आध्यात्मिक शाम► एक सदी की ‘वीणा’, एक साधक का जीवन और एक आत्मीय संवाद► मशालों की रोशनी में गूंजा शहीद भगत सिंह का संदेश, प्रताप नगर में युवाओं ने कहा—‘इंकलाब जिंदाबाद’► पितृपक्ष: जब स्मृतियों में लौट आते हैं माता-पिता, संस्कार और उनका अनंत आशीर्वाद► भाषाएँ अनेक, साहित्य एक! भुवनेश्वर में 26-27 सितंबर को श्रीक्षेत्र राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव► समय के शिल्पी, मानवता के मसीहा: कर्मयोगी कवि संदीप कपूर ‘वक़्तनाम’► आयुर्वेद की राह पर स्वस्थ जीवन की पहल► मेरी कलम, मेरी यात्रा और चौदह वर्षों का विश्वास► जनचेतना की कलम को मिला सम्मान: विनय श्रीवास्तव को ‘भारतेन्दु पत्रकारिता गौरव सम्मान-2026’► ­­शरणार्थी शिविर से संयुक्त राष्ट्र तक… फिर राष्ट्रसेवा के शिखर तक—हरदीप सिंह पुरी की वह यात्रा जो हार मानना नहीं सिखाती!► सांस्कृतिक पुनर्जागरण: ‘ट्रियो सेट ऑफ़ थ्री आर्ट्स’ ने मुंबई में पेश की कव्वाली, सूफी और बॉलीवुड की एक आध्यात्मिक शाम

समय के शिल्पी, मानवता के मसीहा: कर्मयोगी कवि संदीप कपूर ‘वक़्तनाम’

“प्रकृति को बचाएंगे… दुनिया को बदल देंगे।

नया इतिहास बनाएंगे… सबको संबल देंगे।।”

WhatsApp पर जुड़ें
राजनीति, समाज, अध्यात्म और प्रेरणा — रोज़ नई दृष्टि
✅ अभी Follow करें

यह केवल शब्दों की पंक्तियाँ नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे जुझारू कर्मयोगी के जीवन की अंतरात्मा की पुकार और ध्येय वाक्य हैं, जिन्होंने अपनी हर सांस, अपनी हर सोच और अपने जीवन का एक-एक क्षण मानवता, अध्यात्म, प्रकृति संरक्षण और विश्व कल्याण के पावन यज्ञ में समर्पित कर दिया है। वे कोई साधारण व्यक्तित्व नहीं, बल्कि युग-परिवर्तक संकल्प के प्रतीक हैं—’मैन ऑफ़ ‘टाइम’, विश्व सुरक्षा अभियान और अंतर्राष्ट्रीय सद्भावना मंच के संस्थापक-अध्यक्ष, बहुआयामी प्रतिभा के धनी कवि, पत्रकार, लेखक, अभिनेता तथा सामाजिक योद्धा संदीप कपूर ‘वक़्तनाम’।

१. प्रेरणा की पावन सरिता और राष्ट्रभक्ति की अलख

संदीप कपूर जी की जीवन-यात्रा सन 1983 के उस ऐतिहासिक मोड़ से प्रारंभ होती है, जब उन्होंने भारतीय संस्कृति, योग, कला, साहित्य और निष्काम समाज सेवा के पथ पर अपना पहला कदम रखा। उन्होंने मानवता की सेवा को ही ईश्वर की सच्ची पूजा माना और इस मार्ग पर आने वाली हर कठिन चुनौती को अपने अटूट संकल्प से सुगम बना दिया।

उनके जीवन की प्रेरणा शक्ति थीं उनकी पूज्य माता एवं अध्यापिका श्रीमती मंजु कपूर, जिन्होंने उनके बालमन में संस्कारों, धर्म और कर्तव्यनिष्ठा के बीज बोए। वहीं दूसरी ओर, अमर सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अदम्य साहस और स्वामी विवेकानंद की आध्यात्मिक व राष्ट्रवादी चेतना उनके जीवन का मार्गदर्शन करने वाले मशाल बने। संदीप जी ने जीवन के कठिन से कठिन संघर्षों को कभी बाधा नहीं माना, बल्कि उन्हें अपनी सफलता और जनसेवा की सीढ़ियों में तब्दील कर दिया।

राष्ट्रसेवा का जज़्बा उनके खून में रचा-बसा था। उन्होंने भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) में कठोर और अनुशासित सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके उपरांत, वर्ष 1990 से उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (भारत सरकार) के ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी), दूरदर्शन, प्रिंट मीडिया और पत्रकारिता के माध्यम से अपनी ओजस्वी आवाज़ और निर्भीक लेखनी से समाज की सुप्त चेतना को झकझोरा और एक नई क्रांति का सूत्रपात किया।

२. ‘वक़्तनाम’ का प्राकट्य और वैचारिक क्रांति

वर्ष 1991 संदीप जी के जीवन और चिंतन का एक ऐतिहासिक और युगांतरकारी वर्ष सिद्ध हुआ। इसी वर्ष समय (वक़्त) और ईश्वर (नाम) के दिव्य महायोग से ‘वक़्तनाम’ शब्द का सृजन हुआ। यह मात्र एक नाम या उपनाम नहीं था, बल्कि यह समय, प्रकृति, आत्मा और मानवता के गहरे अंतर्संबंधों को प्रकट करने वाली एक दार्शनिक और वैचारिक खोज थी।

‘वक़्तनाम’ के इस महान बैनर तले उन्होंने संपूर्ण मानव जाति के कल्याण के लिए दो अति-महत्वपूर्ण विचार-दर्शन दुनिया के सामने रखे:

  1. ‘आत्म-दर्शन: 12 सूत्र’ — जो व्यक्ति के आंतरिक रूपांतरण और आध्यात्मिक जागृति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
  2. ‘विश्व सुरक्षा – संपूर्ण समाधान: 16 सूत्र’ — जो वैश्विक शांति, प्राकृतिक संतुलन और भटके हुए मानव समाज के लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका हैं।

संदीप कपूर जी ने एक ‘वन मैन आर्मी’ और सच्चे सोशल वॉरियर (सामाजिक योद्धा) के रूप में कार्य किया। संगीन के साए और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी वे कभी झुके नहीं। नकारात्मक शक्तियों के खिलाफ निर्भीक होकर खड़े रहना, समाज सुधार के लिए कड़े कदम उठाना, असहायों के प्राणों की रक्षा करना और समाज में भाईचारे व अनुकूल वातावरण का निर्माण करना उनका ध्येय बन गया।

३. महापुरुषों का सानिध्य और वैश्विक विस्तार

जब नीयत साफ़ और उद्देश्य पवित्र होता है, तो पूरी दुनिया आपके साथ जुड़ने लगती है। संदीप कपूर जी के इस निष्काम और साहसिक विश्व सुरक्षा अभियान से देश-विदेश की कई महान हस्तियों, स्वतंत्रता सेनानियों और प्रबुद्ध मनीषियों ने जुड़कर उन्हें अपना आशीर्वाद और संबल प्रदान किया।

इन महान व्यक्तित्वों में शामिल हैं:

WhatsApp पर जुड़ें
राजनीति, समाज, अध्यात्म और प्रेरणा — रोज़ नई दृष्टि
✅ अभी Follow करें
  • डॉ. शिशिर कुमार बोस: स्वतंत्रता सेनानी एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भतीजे।
  • कैप्टन कर्नल डॉ. लक्ष्मी सहगल (पद्म विभूषण): आज़ाद हिंद फौज की प्रसिद्ध ‘रानी झाँसी रेजिमेंट’ की कमांडर।
  • लेफ्टिनेंट आशा सहाय उर्फ भारती चौधरी: आज़ाद हिंद फौज (INA) की वीर सेनानी।
  • देव कुमार गुरुंग (नेपाल): पूर्व गोरखा फौजी।
  • मोहन प्रसाद शर्मा: नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस।
  • ब्रजमोहन लाल: बिहार के पूर्व राज्यपाल एवं पटना हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस।

इसके अतिरिक्त, कला और संस्कृति जगत से भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा, प्रसिद्ध अभिनेता मुकेश खन्ना, दारा सिंह, और दिग्गज फ़िल्म निर्देशक तपन सिन्हा जैसे महानुभावों ने संदीप जी के मिशन को अपना समर्थन दिया। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भूटान, फिलीपींस सहित कई देशों के राजदूतों और अंतरराष्ट्रीय विद्वानों ने उनके ‘विश्व सुरक्षा अभियान’ की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।

४. साहित्य, पत्रकारिता और अभिनय का संगम

संदीप कपूर ‘वक़्तनाम’ जी का व्यक्तित्व बहुआयामी है। वे एक साथ लेखक, पत्रकार, साहित्यकार, अभिनेता और एक प्रतिबद्ध सामाजिक योद्धा हैं। वर्ष 1988 में उन्होंने अपनी कलम को मानवता का सिपाही बनाया और साहित्य के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया।

उनकी प्रमुख कृतियों में:

  • ‘अमृत कलश’: एक कालजयी काव्य संग्रह जो मानवीय संवेदनाओं को जीवंत करता है।
  • ‘इंटरनेशनल अजगैबीधाम’ और ‘जागो हिन्दुस्तान’: शोधपरक साहित्य जो राष्ट्र चेतना और सांस्कृतिक धरोहर को नई दृष्टि प्रदान करता है।

पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने कभी भी व्यावसायिक समझौतों को स्वीकार नहीं किया। ‘वक़्तनाम’ और ‘मैन ऑफ़ टाइम’ पत्रिकाओं तथा डिजिटल मीडिया चैनलों के माध्यम से उन्होंने निष्पक्ष, निर्भीक और जन-हितैषी पत्रकारिता की अनूठी मिसाल कायम की।

रंगमंच और फ़िल्म जगत में भी उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का लोहा मनवाया। प्रसिद्ध अभिनेता जैकी श्रॉफ के साथ ब्लॉकबस्टर फ़िल्म ‘भूत अंकल’ में उन्होंने साधु और पंडित की यादगार भूमिका निभाई। इसके अलावा, बहुचर्चित कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड पर आधारित फ़िल्म ‘अनलिमिटेड नशा’ में उन्होंने एक निर्भीक और जुझारू पत्रकार का जीवंत किरदार निभाकर यह साबित कर दिया कि एक कलाकार अपनी कला के माध्यम से भी सामाजिक चेतना जगा सकता है।

५. युवा पीढ़ी के लिए ऊर्जा और प्रेरणा के पुंज

आज जब विश्व पर्यावरण संकट, मानसिक तनाव और नैतिक मूल्यों के ह्रास से जूझ रहा है, संदीप कपूर जी एक उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं। विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रीय अखंडता और भारत को पुनः ‘विश्व गुरु’ के पद पर आसीन करने के लिए वे रात-दिन प्रयासरत हैं।

वे देश-विदेश में मोटिवेशनल क्लासेज, सेमिनार, कवि सम्मेलनों, और आध्यात्मिक सम्मेलनों के माध्यम से युवाओं में नई ऊर्जा, सकारात्मक सोच और राष्ट्रभक्ति का संचार कर रहे हैं। एक युग-प्रतिनिधि, कलाकार, ओजस्वी साहित्यकार, प्रमाणित योग प्रशिक्षक और आध्यात्मिक प्रणेता के रूप में उनका जीवन आज की युवा पीढ़ी के लिए एक जीता-जागता मार्गदर्शक (रोल मॉडल) है।

उनका जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि आपके विचार शुद्ध हैं, आपकी निष्ठा अटल है और आपकी सोच सकारात्मक है, तो आप दुनिया को बदलने का सामर्थ्य रखते हैं।

“नाम रत्न अनमोल है, यह जीवन आधार।

राधे-राधे बोलिए, भव सागर से पार।।”

संपर्क सूत्र एवं आधिकारिक जानकारी:

  • हेल्पलाइन / WhatsApp: 9507512001
  • ईमेल: manoftime101@gmail.com
  • अभियान: मैन ऑफ़ टाइम – विश्व सुरक्षा अभियान एवं अंतर्राष्ट्रीय सद्भावना मंच

विनय श्रीवास्तव
लेखक | ब्लॉगर | स्वतंत्र पत्रकार

3 thoughts on “समय के शिल्पी, मानवता के मसीहा: कर्मयोगी कवि संदीप कपूर ‘वक़्तनाम’”

  1. SANDEEP KAPOOR WAQTNAAM

    🏵️ राधे-राधे 🚩
    ईश्वर की कृपा से युवा कवि, ओजस्वी पत्रकार और कलाकार विनय श्रीवास्तव जी सकारात्मक सोच एवं व्यापक दृष्टिकोण के साथ सदा अग्रसर रहें। आपका जीवन मंगलमय हो, साधुवाद।
    संदीप कपूर वक़्तनाम
    30 सितंबर 2026 बुधवार, भारत

    1. जय श्री राधे राधे।
      बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय। आपका स्नेह और आशीर्वाद हमेशा बनी रहे।

  2. SANDEEP KAPOOR WAQTNAAM

    🕉️ राधे-राधे 🚩
    ईश्वर की कृपा से युवा कवि, ओजस्वी पत्रकार और कलाकार विनय श्रीवास्तव जी सकारात्मक सोच एवं व्यापक दृष्टिकोण के साथ सदा अग्रसर रहें। आपका जीवन मंगलमय हो, साधुवाद।
    संदीप कपूर वक़्तनाम
    30 सितंबर 2026 बुधवार, भारत

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top