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अध्यात्म

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पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) : भक्ति, कृपा और आत्मशुद्धि का दिव्य अवसर (17 मई से 15 जून 2026)

जब स्वयं भगवान ने एक उपेक्षित मास को अपना नाम दिया सनातन धर्म की परंपराओं में प्रत्येक पर्व, व्रत और मास का अपना विशेष महत्व है, किन्तु वर्ष में आने वाला पुरुषोत्तम मास, जिसे अधिक मास भी कहा जाता है, अत्यंत दुर्लभ और दिव्य माना गया है। यह केवल एक कालखंड नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण

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अध्यात्म

🌺 गुप्त वृन्दावन धाम: सेवा, समर्पण और श्रीकृष्ण कृपा का दिव्य संगम

✨ “प्रभु को हमारी सेवा की आवश्यकता नहीं, पर उनकी सेवा का अवसर ही जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है।” राजस्थान की पावन भूमि, जयपुर के जगतपुरा में एक ऐसा दिव्य स्वप्न आकार ले रहा है, जो केवल एक मंदिर का निर्माण नहीं, बल्कि भक्ति के पुनर्जागरण का माध्यम बन रहा है—गुप्त वृन्दावन धाम। यह

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अध्यात्म

“जीवन-मृत्यु के बीच ठहरा एक जीवन: हरिश राणा और इच्छामृत्यु का आध्यात्मिक सत्य”

भारत के न्यायिक इतिहास में एक ऐसा क्षण आया है, जिसने केवल कानून की सीमाओं को ही नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के शाश्वत रहस्य पर भी गहरी बहस छेड़ दी है। 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरिश राणा को पैसिव इच्छामृत्यु (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की अनुमति देकर एक ऐसा निर्णय दिया, जो संवेदनाओं,

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अध्यात्म

श्री कृष्ण का जीवन: त्याग, मित्रता और नेतृत्व का आदर्श

भारतीय संस्कृति और धर्म में भगवान श्री कृष्ण का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। वे केवल एक देवता नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक पहलू का आदर्श हैं। उनके जीवन में त्याग, मित्रता, प्रेम, धर्म और नेतृत्व का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है। चाहे वह बचपन की लीलाएँ हों, युद्ध की रणनीतियाँ हों या समाज और

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