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राजनीति

भरत तिवारी एनकाउंटर विवाद पर बिहार में कानून-व्यवस्था, रोजगार, उद्योग और विकास को लेकर उठते सवालों का प्रतीकात्मक चित्र।
राजनीति

भरत तिवारी एनकाउंटर विवाद: क्या बिहार को गोलियों की गूंज चाहिए या विकास की आवाज़ ?

किसी भी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि एनकाउंटर नहीं, बल्कि वह भरोसा होता है जो जनता के दिल में उसके प्रति पैदा होता है। बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर विवाद ने एक बार फिर सत्ता, पुलिस और न्याय व्यवस्था के सामने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था एक […]

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योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को अधिक सार्थक, संतुलित और आनंदमय बनाने की प्रक्रिया है।
राजनीति

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: जयपुर के पशुपतिनाथ नगर में उत्साह के साथ मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, दिया स्वस्थ जीवन का संदेश

12वेंअंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जयपुर स्थित पशुपतिनाथ नगर में भी योग के प्रति लोगों का उत्साह देखने लायक रहा। क्षेत्र के निवासियों ने बड़े उत्साह और उमंग के साथ सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन और सकारात्मक सोच का संदेश दिया। सुबह के शांत वातावरण में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने एकत्र होकर

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"खेला अब टीएमसी के भीतर?"
राजनीति

बंगाल में ‘खेला’ अब टीएमसी के भीतर? बागियों की बढ़ती बेचैनी, ममता की चुनौती और भाजपा के लिए खुलते अवसर”

जिस पार्टी ने एक दशक से अधिक समय तक बंगाल की राजनीति पर निर्विवाद प्रभुत्व बनाए रखा, आज उसी तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की आवाज़ें तेज़ होती दिखाई दे रही हैं। क्या यह केवल अस्थायी संकट है या फिर बंगाल की राजनीति किसी बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी है? पश्चिम बंगाल की राजनीति

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Cricket passion: Suryavanshi and Tendulkar unite
राजनीति

क्या क्रिकेट के भगवान बदलने वाले हैं? सचिन तेंदुलकर और वैभव सूर्यवंशी की तुलना पर उठते सवाल

भारतीय क्रिकेट में जब भी कोई युवा खिलाड़ी असाधारण प्रदर्शन करता है, क्रिकेट प्रेमियों की कल्पनाएं उड़ान भरने लगती हैं। कभी किसी में विराट कोहली की झलक दिखाई देती है, कभी किसी में महेंद्र सिंह धोनी का शांत स्वभाव, तो कभी किसी को अगला युवराज सिंह बताया जाने लगता है। लेकिन इन दिनों जिस नाम

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राजनीति

“तनख्वाह बढ़े चवन्नी, महंगाई बढ़े रुपैया” — आखिर प्राइवेट सेक्टर का कर्मचारी कब तक पिसता रहेगा ?

1. हर महीने की पहली तारीख का डर और मिडिल क्लास की टूटती उम्मीदें कभी भारतीय मिडिल क्लास को देश की सबसे मजबूत रीढ़ कहा जाता था। वही मिडिल क्लास जो सुबह से रात तक मेहनत करता है, टैक्स देता है, बच्चों की पढ़ाई का सपना देखता है, बुजुर्ग माता-पिता की दवा खरीदता है और

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CBSE - गड़बड़ियों ने तोड़ा भरोसा
राजनीति

सीबीएसई की गड़बड़ियों ने तोड़ा भरोसा

क्या देश की सबसे बड़ी शिक्षा व्यवस्था छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है? देश में करोड़ों छात्र और अभिभावक हर वर्ष केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी Central Board of Secondary Education पर भरोसा करके अपने बच्चों का भविष्य उसके हाथों में सौंपते हैं। यह भरोसा केवल परीक्षा आयोजित करने का नहीं होता,

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