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राष्ट्रभक्ति का महापर्व स्वतंत्रता दिवस पर : ‘मेरा भारत महान’ कार्यक्रम में होगा भारत वैभव सम्मान-2026 का भव्य आयोजन

स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मैन ऑफ़ टाइम – अंतर्राष्ट्रीय सदभावना मंच अपने 147वें आयोजन के अंतर्गत 15 अगस्त 2026 (शनिवार) को शाम 7:00 बजे गूगल मीट के माध्यम से ऑनलाइन “स्वतंत्रता दिवस समारोह–2026 : मेरा भारत महान” का आयोजन करने जा रहा है। इस अवसर पर देशभर के साहित्यकारों, पत्रकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों,

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युवाओं की स्थिति और दुविधाएँ
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युवाओं की हालत: आज की पीढ़ी का द्वंद्व और अनिश्चितता का सच

आज का युवा न तो पूरी तरह अपने पिता से कदम-से-कदम मिला पा रहा है और न ही पूरी तरह अपने बेटे से मिला पाएगा। वह बीच में फँस गया है, जैसे कोई समुद्र के बीचों-बीच फँस जाए। न तो वह मछली की तरह समुद्र के अंदर जा सकता है और न ही इंसानों की

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क्या मेडिकल कॉलेज शिक्षा के मंदिर हैं या छात्रों की प्रताड़ना के केंद्र? MBBS छात्रों के गंभीर आरोपों ने खड़े किए बड़े सवाल

MBBS छात्रों का फूटा आक्रोश: दादा के निधन पर भी छुट्टी नहीं, हॉस्टल बना ‘जेल’, आखिर कब जागेगा सिस्टम? लेखक: विनय श्रीवास्तव देश में डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप माना जाता है। लेकिन एक सवाल आज पूरे समाज के सामने खड़ा है—जो संस्थान भविष्य के डॉक्टर तैयार कर रहे हैं, यदि वहीं छात्रों के

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आमिर खान की तीसरी शादी-भाग 2 : “मेरी ज़िंदगी, मेरी मर्ज़ी” बनाम “सार्वजनिक जीवन, सार्वजनिक जिम्मेदारी”

आज के दौर में जब भी किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के निजी जीवन पर चर्चा होती है, सबसे पहले एक तर्क सामने आता है—”यह उनकी निजी ज़िंदगी है।” इस तर्क में पर्याप्त सच्चाई भी है। भारतीय संविधान प्रत्येक वयस्क नागरिक को अपनी पसंद से जीवन जीने, विवाह करने और अपने व्यक्तिगत निर्णय लेने की स्वतंत्रता देता

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आमिर खान की तीसरी शादी और बदलते “सेलिब्रिटी संस्कार” पर बड़ा सवाल – क्या 61 की उम्र में फिर रिश्तों की तलाश समाज को सही संदेश देती है?

सवाल केवल आमिर खान का नहीं, उस बदलती सोच का है जो समाज के सामने नया आदर्श गढ़ रही है। बॉलीवुड के सुपरस्टार आमिर खान एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह उनकी कोई फिल्म, सामाजिक संदेश या बॉक्स ऑफिस की सफलता नहीं, बल्कि उनका निजी जीवन है। 61 वर्ष की

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भरत तिवारी एनकाउंटर विवाद पर बिहार में कानून-व्यवस्था, रोजगार, उद्योग और विकास को लेकर उठते सवालों का प्रतीकात्मक चित्र।
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भरत तिवारी एनकाउंटर विवाद: क्या बिहार को गोलियों की गूंज चाहिए या विकास की आवाज़ ?

किसी भी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि एनकाउंटर नहीं, बल्कि वह भरोसा होता है जो जनता के दिल में उसके प्रति पैदा होता है। बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर विवाद ने एक बार फिर सत्ता, पुलिस और न्याय व्यवस्था के सामने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था एक

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