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फ़िरोज़ गांधी की अनकही कहानी (भाग – 3)

आज़ादी के बाद नई भूमिका और पहचान की तलाश 1947 में देश आज़ाद हुआ तो हर स्वतंत्रता सेनानी के सामने एक नया प्रश्न खड़ा था—अब आगे क्या? बहुत से लोग सत्ता में आए, कुछ प्रशासन में चले गए और कुछ ने अपने-अपने तरीके से राष्ट्र निर्माण में योगदान देना शुरू किया। फ़िरोज़ गांधी भी इसी

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फ़िरोज़ गांधी की अनकही कहानी (भाग – 2)

स्वतंत्रता आंदोलन, प्रेम और एक साहसी रिश्ते की शुरुआत भाग–1 में हमने देखा कि किस तरह एक पारसी परिवार में जन्मा एक संवेदनशील और जुझारू युवक इलाहाबाद की राजनीतिक धरती पर आकार ले रहा था। अब कहानी उस मोड़ पर पहुँचती है, जहाँ फ़िरोज़ गांधी केवल एक जागरूक युवा नहीं रहते, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के

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फ़िरोज़ गांधी की अनकही कहानी (भाग – 1)

इतिहास के साये में छूटा एक ‘गांधी’ भारतीय राजनीति का इतिहास जितना विशाल है, उतना ही रहस्यमय भी। इस इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो समय के साथ और अधिक चमकते गए, जबकि कुछ नाम ऐसे भी हैं जिनकी चमक इतिहास की मोटी किताबों के बीच कहीं दब गई। लेकिन जब उन नामों की

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युद्ध की आंच में जलती रसोई: गैस की कालाबाज़ारी पर सख्त कार्रवाई का समय

दुनिया के कई खाड़ी देशों में बढ़ते युद्ध और तनाव का असर अब भारत के आम नागरिकों की रसोई तक पहुंचने लगा है। बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान सहित कई राज्यों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि एलपीजी गैस सिलेंडर की बुकिंग के बावजूद समय पर डिलीवरी नहीं हो रही। कई जगह उपभोक्ताओं को

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युद्ध नहीं, समाधान की राह: ऊर्जा संकट के दौर में जिम्मेदार भारत की आवश्यकता

“युद्ध कभी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता; वह केवल विनाश का मार्ग खोलता है। सच्ची विजय तब होती है जब संघर्ष को संवाद, सहयोग और दूरदर्शिता से शांति में बदला जाए।” मानव सभ्यता के इतिहास में युद्धों ने हमेशा विकास की गति को रोककर विनाश का नया अध्याय लिखा है। जब भी विश्व

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“नीतीश का राज्यसभा सफर और बदलती सियासत — क्या अब बिहार पलायन की पीड़ा से निकलकर पुनर्निर्माण की राह पकड़ेगा?”

सत्ता परिवर्तन की दस्तक: दो दशकों के युग का संभावित अंत बिहार की राजनीति एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। लंबे समय से राज्य की सत्ता का नेतृत्व करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राज्यसभा की ओर कदम बढ़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं। यदि यह प्रक्रिया पूरी होती है तो यह

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