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► मैन ऑफ़ टाइम – अंतर्राष्ट्रीय सदभावना मंच पर ‘मेरा भारत महान’ में गूॅंजा देशभक्त़ि का स्वर, साहित्यकारों, कलाकारों और पत्रकारों ने दिया राष्ट्रहित और विश्व़ कल्याण का संदेश► निष्काम कर्मयोगी मुकेश यादव: बीमारी को हरा कर समाज सेवा की अलख जगाने वाले एक सच्चे नायक► व्यक्ति विशेष: जीतन राम मांझी► मर न सके हम देश की खातिर, लेकिन जी तो सकते हैं► पद रहित सेवा ही विकास का मूलमंत्र, जिसे जयपुर के ये समाजसेवी अपने कर्म से कर रहे हैं साकार► “मोदी-वियोग के मारे पत्रकार और अचानक ईमानदार हुई EVM”► दिल्ली लक्ष्मी योजना: महिलाओं को हर महीने ₹2,500 कैसे मिलेंगे? क्या आप भी लक्ष्मी योजना की पात्र हैं—विवाहित, अविवाहित, विधवा, संपत्ति और आवेदन से जुड़े हर सवाल का आसान जवाब► अर्णब गोस्वामी से मुकेश अंबानी के अँटीलिया बम प्रकरण तक: अनिल देशमुख का बड़ा खुलासा—“पूरी साजिश परमबीर सिंह की थी”, अब होगी सच की पूरी पड़ताल?► बांकीपुर में BJP की हार: क्या युवाओं की नाराजगी, शासन पर सवाल और प्रशांत किशोर की रणनीति ने बदला चुनाव का गणित?► ओपन माइक स्टूडियो पर युवा कलाकारों द्वारा यौन शोषण, धर्म परिवर्तन के गंभीर आरोप, जांच की उठी मांग► मैन ऑफ़ टाइम – अंतर्राष्ट्रीय सदभावना मंच पर ‘मेरा भारत महान’ में गूॅंजा देशभक्त़ि का स्वर, साहित्यकारों, कलाकारों और पत्रकारों ने दिया राष्ट्रहित और विश्व़ कल्याण का संदेश► निष्काम कर्मयोगी मुकेश यादव: बीमारी को हरा कर समाज सेवा की अलख जगाने वाले एक सच्चे नायक► व्यक्ति विशेष: जीतन राम मांझी► मर न सके हम देश की खातिर, लेकिन जी तो सकते हैं► पद रहित सेवा ही विकास का मूलमंत्र, जिसे जयपुर के ये समाजसेवी अपने कर्म से कर रहे हैं साकार► “मोदी-वियोग के मारे पत्रकार और अचानक ईमानदार हुई EVM”► दिल्ली लक्ष्मी योजना: महिलाओं को हर महीने ₹2,500 कैसे मिलेंगे? क्या आप भी लक्ष्मी योजना की पात्र हैं—विवाहित, अविवाहित, विधवा, संपत्ति और आवेदन से जुड़े हर सवाल का आसान जवाब► अर्णब गोस्वामी से मुकेश अंबानी के अँटीलिया बम प्रकरण तक: अनिल देशमुख का बड़ा खुलासा—“पूरी साजिश परमबीर सिंह की थी”, अब होगी सच की पूरी पड़ताल?► बांकीपुर में BJP की हार: क्या युवाओं की नाराजगी, शासन पर सवाल और प्रशांत किशोर की रणनीति ने बदला चुनाव का गणित?► ओपन माइक स्टूडियो पर युवा कलाकारों द्वारा यौन शोषण, धर्म परिवर्तन के गंभीर आरोप, जांच की उठी मांग► मैन ऑफ़ टाइम – अंतर्राष्ट्रीय सदभावना मंच पर ‘मेरा भारत महान’ में गूॅंजा देशभक्त़ि का स्वर, साहित्यकारों, कलाकारों और पत्रकारों ने दिया राष्ट्रहित और विश्व़ कल्याण का संदेश► निष्काम कर्मयोगी मुकेश यादव: बीमारी को हरा कर समाज सेवा की अलख जगाने वाले एक सच्चे नायक► व्यक्ति विशेष: जीतन राम मांझी► मर न सके हम देश की खातिर, लेकिन जी तो सकते हैं► पद रहित सेवा ही विकास का मूलमंत्र, जिसे जयपुर के ये समाजसेवी अपने कर्म से कर रहे हैं साकार► “मोदी-वियोग के मारे पत्रकार और अचानक ईमानदार हुई EVM”► दिल्ली लक्ष्मी योजना: महिलाओं को हर महीने ₹2,500 कैसे मिलेंगे? क्या आप भी लक्ष्मी योजना की पात्र हैं—विवाहित, अविवाहित, विधवा, संपत्ति और आवेदन से जुड़े हर सवाल का आसान जवाब► अर्णब गोस्वामी से मुकेश अंबानी के अँटीलिया बम प्रकरण तक: अनिल देशमुख का बड़ा खुलासा—“पूरी साजिश परमबीर सिंह की थी”, अब होगी सच की पूरी पड़ताल?► बांकीपुर में BJP की हार: क्या युवाओं की नाराजगी, शासन पर सवाल और प्रशांत किशोर की रणनीति ने बदला चुनाव का गणित?► ओपन माइक स्टूडियो पर युवा कलाकारों द्वारा यौन शोषण, धर्म परिवर्तन के गंभीर आरोप, जांच की उठी मांग

Author name: Vinay Shrivastav

विनय श्रीवास्तव लेखक | ब्लॉगर | स्वतंत्र पत्रकार विनय श्रीवास्तव एक प्रतिबद्ध लेखक, ब्लॉगर एवं स्वतंत्र पत्रकार हैं, जो राष्ट्रीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, समसामयिक विषयों और जनजीवन से जुड़े मुद्दों पर गहन शोध-आधारित एवं विश्लेषणात्मक लेखन के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी लेखनी तथ्य, संतुलन और सामाजिक उत्तरदायित्व की मजबूत आधारशिला पर आधारित है। पिछले एक दशक से अधिक समय से उनके लेख विभिन्न राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय समाचार पत्रों, पत्रिकाओं तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं। उन्होंने भारतीय राजनीति, शासन-प्रशासन, सामाजिक परिवर्तन, ग्रामीण भारत, युवा चुनौतियाँ, सांस्कृतिक विमर्श और समकालीन राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर एवं विचारोत्तेजक लेखन किया है। विनय श्रीवास्तव का मानना है कि लेखन केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का साधन और बौद्धिक जिम्मेदारी का दायित्व है। वे अपने लेखों के माध्यम से तथ्यपरक विश्लेषण, स्वस्थ वैचारिक संवाद और राष्ट्रहित की दृष्टि को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि पाठकों में विवेक, जागरूकता और विचारशीलता को सशक्त बनाना है। वर्ष 2026 में उनकी पहली पुस्तक “मन-मोदी” प्रकाशित हुई, जिसका विमोचन नई दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में किया गया। यह पुस्तक भारत के दो प्रधानमंत्रियों—डॉ. मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी—के नेतृत्व काल का सकारात्मक, तथ्याधारित एवं तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें दोनों कार्यकालों की नीतियों, निर्णयों, उपलब्धियों तथा राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उनके प्रभाव का संतुलित अध्ययन किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि समकालीन भारतीय राजनीति को समझने हेतु एक निष्पक्ष, रचनात्मक और विचारपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है। साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले विनय श्रीवास्तव ने संघर्ष, अध्ययन और निरंतर लेखन के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वे सत्य, विवेक और सामाजिक चेतना को केंद्र में रखकर लेखन करते हैं तथा राष्ट्र, समाज और विचार की सकारात्मक दिशा में निरंतर योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह पुस्तक Amazon पर उपलब्ध है: 👉 “मन-मोदी” – विनय श्रीवास्तव https://www.amazon.in/dp/B0G69QT373

युवाओं की स्थिति और दुविधाएँ
राजनीति

युवाओं की हालत: आज की पीढ़ी का द्वंद्व और अनिश्चितता का सच

आज का युवा न तो पूरी तरह अपने पिता से कदम-से-कदम मिला पा रहा है और न ही पूरी तरह अपने बेटे से मिला पाएगा। वह बीच में फँस गया है, जैसे कोई समुद्र के बीचों-बीच फँस जाए। न तो वह मछली की तरह समुद्र के अंदर जा सकता है और न ही इंसानों की […]

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राजनीति

क्या मेडिकल कॉलेज शिक्षा के मंदिर हैं या छात्रों की प्रताड़ना के केंद्र? MBBS छात्रों के गंभीर आरोपों ने खड़े किए बड़े सवाल

MBBS छात्रों का फूटा आक्रोश: दादा के निधन पर भी छुट्टी नहीं, हॉस्टल बना ‘जेल’, आखिर कब जागेगा सिस्टम? लेखक: विनय श्रीवास्तव देश में डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप माना जाता है। लेकिन एक सवाल आज पूरे समाज के सामने खड़ा है—जो संस्थान भविष्य के डॉक्टर तैयार कर रहे हैं, यदि वहीं छात्रों के

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हिन्दी महाकाव्य दृश्य संकलन
अध्यात्म

क्या विचारों में राम और बुद्धि में कृष्ण ही आज के समय में सफल जीवन जीने की सबसे बड़ी साधना है?

राम की करुणा और कृष्ण की नीति — क्या यही है कलियुग का संतुलित धर्म ? भारत की आध्यात्मिक परंपरा ने संसार को केवल पूजा-पद्धति नहीं दी, बल्कि जीवन जीने की ऐसी कला दी है, जो हर युग में मनुष्य का मार्गदर्शन करती रही है। जब भी समाज भ्रमित हुआ, जब भी सत्य और असत्य

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राजनीति

आमिर खान की तीसरी शादी-भाग 2 : “मेरी ज़िंदगी, मेरी मर्ज़ी” बनाम “सार्वजनिक जीवन, सार्वजनिक जिम्मेदारी”

आज के दौर में जब भी किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के निजी जीवन पर चर्चा होती है, सबसे पहले एक तर्क सामने आता है—”यह उनकी निजी ज़िंदगी है।” इस तर्क में पर्याप्त सच्चाई भी है। भारतीय संविधान प्रत्येक वयस्क नागरिक को अपनी पसंद से जीवन जीने, विवाह करने और अपने व्यक्तिगत निर्णय लेने की स्वतंत्रता देता

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राजनीति

आमिर खान की तीसरी शादी और बदलते “सेलिब्रिटी संस्कार” पर बड़ा सवाल – क्या 61 की उम्र में फिर रिश्तों की तलाश समाज को सही संदेश देती है?

सवाल केवल आमिर खान का नहीं, उस बदलती सोच का है जो समाज के सामने नया आदर्श गढ़ रही है। बॉलीवुड के सुपरस्टार आमिर खान एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह उनकी कोई फिल्म, सामाजिक संदेश या बॉक्स ऑफिस की सफलता नहीं, बल्कि उनका निजी जीवन है। 61 वर्ष की

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केतन हत्याकांड पर आधारित सांकेतिक चित्र, रिश्तों में बढ़ती हिंसा और सामाजिक चिंता
समाज और सच्चाई

केतन हत्याकांड: रिश्तों की बागडोर और हमारी ज़िम्मेदारी — क्या हिंसा नई पीढ़ी के भविष्य को निगल रही है?

रिश्ते केवल दो व्यक्तियों का साथ नहीं होते, बल्कि परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों की नींव भी होते हैं। पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका या जीवनसाथी के बीच विश्वास, सम्मान और संवाद जितना मजबूत होगा, समाज उतना ही स्वस्थ और सुरक्षित बनेगा। लेकिन हाल के वर्षों में जिस प्रकार रिश्तों के नाम पर हत्या, आत्महत्या, धोखा और

केतन हत्याकांड: रिश्तों की बागडोर और हमारी ज़िम्मेदारी — क्या हिंसा नई पीढ़ी के भविष्य को निगल रही है? Read Post »

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