BREAKING UPDATES
► क्या क्रिकेट के भगवान बदलने वाले हैं? सचिन तेंदुलकर और वैभव सूर्यवंशी की तुलना पर उठते सवाल► डॉ. बशीर बद्र: उर्दू ग़ज़ल के वो शहंशाह, जिनकी शायरी ने लाखों दिलों को छू लिया► “तनख्वाह बढ़े चवन्नी, महंगाई बढ़े रुपैया” — आखिर प्राइवेट सेक्टर का कर्मचारी कब तक पिसता रहेगा ?► प्रताप नगर की ज़मीन पर विवाद: आखिर क्यों सड़कों पर उतरने को मजबूर हुआ हिंदू समाज?► सीबीएसई की गड़बड़ियों ने तोड़ा भरोसा► “नौतपा या प्रकृति का चेतावनी संकेत?” आखिर क्यों हर साल बढ़ती जा रही है गर्मी की मार!► लोकतंत्र में असहमति जरूरी, लेकिन भाषा की मर्यादा उससे भी ज्यादा जरूरी► क्या है कॉकरोच जनता पार्टी? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद अचानक क्यों ट्रेंड करने लगी CJP► सुधारों की राह देखते सरकारी स्कूल► मार्को पोलो की यात्रा और भारत का अद्भुत वर्णन► क्या क्रिकेट के भगवान बदलने वाले हैं? सचिन तेंदुलकर और वैभव सूर्यवंशी की तुलना पर उठते सवाल► डॉ. बशीर बद्र: उर्दू ग़ज़ल के वो शहंशाह, जिनकी शायरी ने लाखों दिलों को छू लिया► “तनख्वाह बढ़े चवन्नी, महंगाई बढ़े रुपैया” — आखिर प्राइवेट सेक्टर का कर्मचारी कब तक पिसता रहेगा ?► प्रताप नगर की ज़मीन पर विवाद: आखिर क्यों सड़कों पर उतरने को मजबूर हुआ हिंदू समाज?► सीबीएसई की गड़बड़ियों ने तोड़ा भरोसा► “नौतपा या प्रकृति का चेतावनी संकेत?” आखिर क्यों हर साल बढ़ती जा रही है गर्मी की मार!► लोकतंत्र में असहमति जरूरी, लेकिन भाषा की मर्यादा उससे भी ज्यादा जरूरी► क्या है कॉकरोच जनता पार्टी? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद अचानक क्यों ट्रेंड करने लगी CJP► सुधारों की राह देखते सरकारी स्कूल► मार्को पोलो की यात्रा और भारत का अद्भुत वर्णन► क्या क्रिकेट के भगवान बदलने वाले हैं? सचिन तेंदुलकर और वैभव सूर्यवंशी की तुलना पर उठते सवाल► डॉ. बशीर बद्र: उर्दू ग़ज़ल के वो शहंशाह, जिनकी शायरी ने लाखों दिलों को छू लिया► “तनख्वाह बढ़े चवन्नी, महंगाई बढ़े रुपैया” — आखिर प्राइवेट सेक्टर का कर्मचारी कब तक पिसता रहेगा ?► प्रताप नगर की ज़मीन पर विवाद: आखिर क्यों सड़कों पर उतरने को मजबूर हुआ हिंदू समाज?► सीबीएसई की गड़बड़ियों ने तोड़ा भरोसा► “नौतपा या प्रकृति का चेतावनी संकेत?” आखिर क्यों हर साल बढ़ती जा रही है गर्मी की मार!► लोकतंत्र में असहमति जरूरी, लेकिन भाषा की मर्यादा उससे भी ज्यादा जरूरी► क्या है कॉकरोच जनता पार्टी? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद अचानक क्यों ट्रेंड करने लगी CJP► सुधारों की राह देखते सरकारी स्कूल► मार्को पोलो की यात्रा और भारत का अद्भुत वर्णन

Author name: Vinay Shrivastav

विनय श्रीवास्तव लेखक | ब्लॉगर | स्वतंत्र पत्रकार विनय श्रीवास्तव एक प्रतिबद्ध लेखक, ब्लॉगर एवं स्वतंत्र पत्रकार हैं, जो राष्ट्रीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, समसामयिक विषयों और जनजीवन से जुड़े मुद्दों पर गहन शोध-आधारित एवं विश्लेषणात्मक लेखन के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी लेखनी तथ्य, संतुलन और सामाजिक उत्तरदायित्व की मजबूत आधारशिला पर आधारित है। पिछले एक दशक से अधिक समय से उनके लेख विभिन्न राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय समाचार पत्रों, पत्रिकाओं तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं। उन्होंने भारतीय राजनीति, शासन-प्रशासन, सामाजिक परिवर्तन, ग्रामीण भारत, युवा चुनौतियाँ, सांस्कृतिक विमर्श और समकालीन राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर एवं विचारोत्तेजक लेखन किया है। विनय श्रीवास्तव का मानना है कि लेखन केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का साधन और बौद्धिक जिम्मेदारी का दायित्व है। वे अपने लेखों के माध्यम से तथ्यपरक विश्लेषण, स्वस्थ वैचारिक संवाद और राष्ट्रहित की दृष्टि को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि पाठकों में विवेक, जागरूकता और विचारशीलता को सशक्त बनाना है। वर्ष 2026 में उनकी पहली पुस्तक “मन-मोदी” प्रकाशित हुई, जिसका विमोचन नई दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में किया गया। यह पुस्तक भारत के दो प्रधानमंत्रियों—डॉ. मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी—के नेतृत्व काल का सकारात्मक, तथ्याधारित एवं तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें दोनों कार्यकालों की नीतियों, निर्णयों, उपलब्धियों तथा राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उनके प्रभाव का संतुलित अध्ययन किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि समकालीन भारतीय राजनीति को समझने हेतु एक निष्पक्ष, रचनात्मक और विचारपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है। साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले विनय श्रीवास्तव ने संघर्ष, अध्ययन और निरंतर लेखन के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वे सत्य, विवेक और सामाजिक चेतना को केंद्र में रखकर लेखन करते हैं तथा राष्ट्र, समाज और विचार की सकारात्मक दिशा में निरंतर योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह पुस्तक Amazon पर उपलब्ध है: 👉 “मन-मोदी” – विनय श्रीवास्तव https://www.amazon.in/dp/B0G69QT373

समाज और सच्चाई

कर्म श्री अवार्ड से सम्मानित होंगे डॉ. राज शर्मा: 25 देशों की उपस्थिति में जयपुर बनेगा वैश्विक समरसता का केंद्र

भारत की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और वैश्विक भाईचारे की भावना को एक नई ऊँचाई देने जा रहा है “अंतरराष्ट्रीय समरसता मंच” का भव्य आयोजन, जो आगामी 13 मई 2026 को राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित होगा। इस विशेष समारोह में देश-विदेश से आए गणमान्य अतिथियों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों, चिकित्सकों, उद्योगपतियों और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों की […]

कर्म श्री अवार्ड से सम्मानित होंगे डॉ. राज शर्मा: 25 देशों की उपस्थिति में जयपुर बनेगा वैश्विक समरसता का केंद्र Read Post »

राजनीति

बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के सूत्रधार शुभेंदु अधिकारी कैसे बने बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा

कभी “दीदी” के सबसे भरोसेमंद नेता, आज भाजपा के लिए बंगाल विजय का सबसे मजबूत आधार पश्चिम बंगाल की राजनीति में बदलाव की चर्चा लंबे समय से हो रही थी, लेकिन शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह बदलाव इतनी तेजी से इतिहास बन जाएगा। भाजपा की ऐतिहासिक जीत और शुभेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री

बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के सूत्रधार शुभेंदु अधिकारी कैसे बने बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा Read Post »

राजनीति

बंगाल में सत्ता परिवर्तन का नया अध्याय: नंदीग्राम से नवाबगंज तक शुभेंदु अधिकारी के संघर्ष, रणनीति और उदय की कहानी

राजतिलक की करो तैयारी… पश्चिम बंगाल में आ गए  शुभेंदु  अधिकारी! कभी ममता के सबसे भरोसेमंद सिपाही, आज भाजपा के सबसे बड़े बंगाली चेहरे पश्चिम बंगाल की राजनीति में वर्षों बाद ऐसा दृश्य देखने को मिला है, जब सत्ता के गलियारों में “परिवर्तन” केवल नारे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वास्तविकता बन गया। तृणमूल कांग्रेस

बंगाल में सत्ता परिवर्तन का नया अध्याय: नंदीग्राम से नवाबगंज तक शुभेंदु अधिकारी के संघर्ष, रणनीति और उदय की कहानी Read Post »

राजनीति

सत्ता नहीं मिली तो लोकतंत्र ही गलत? विपक्ष की मानसिकता चिंताजनक

भारतीय लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे जीवंत लोकतंत्र माना जाता है। यहाँ सत्ता का असली मालिक कोई नेता, दल या विचारधारा नहीं, बल्कि देश की जनता होती है। हर चुनाव में करोड़ों मतदाता अपने विवेक, अनुभव और उम्मीदों के आधार पर फैसला सुनाते हैं। यही जनादेश लोकतंत्र की आत्मा होता है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण

सत्ता नहीं मिली तो लोकतंत्र ही गलत? विपक्ष की मानसिकता चिंताजनक Read Post »

राजनीति

जनादेश का अपमान कब तक? हारते ही लोकतंत्र पर सवाल उठाना विपक्ष की खतरनाक प्रवृत्ति

भारतीय लोकतंत्र केवल एक राजनीतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों की आस्था, विश्वास और सहभागिता का जीवंत प्रतीक है। यह वह व्यवस्था है जिसमें देश का एक साधारण नागरिक भी अपनी उंगली पर लगी स्याही के माध्यम से सत्ता की दिशा तय करता है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में चुनाव केवल सरकार बनाने

जनादेश का अपमान कब तक? हारते ही लोकतंत्र पर सवाल उठाना विपक्ष की खतरनाक प्रवृत्ति Read Post »

प्रेरक व्यक्तित्व

किराने की दुकान के छोटे स्टोर रूम से ग्लोबल कंपनी तक: हरेश गोयल की संघर्ष, समर्पण और सफलता की प्रेरक कहानी

किसी ने सच ही कहा है—“अगर इरादे मजबूत हों, तो छोटी सी शुरुआत भी एक दिन बड़ी मंज़िल तक पहुँचा देती है।”यह कहानी ऐसे ही एक इंसान की है, जिसने अभावों में जन्म लिया, संघर्षों में खुद को तराशा और अपने सपनों को मेहनत की रोशनी से सच कर दिखाया। यह कहानी है हरेश गोयल

किराने की दुकान के छोटे स्टोर रूम से ग्लोबल कंपनी तक: हरेश गोयल की संघर्ष, समर्पण और सफलता की प्रेरक कहानी Read Post »

Scroll to Top