भोजपुरी अस्मिता के प्रहरी: अजीत दुबे की संघर्षगाथा
बलिया से दिल्ली तक मातृभाषा के मान-सम्मान के लिए समर्पित एक जीवन हर समाज की आत्मा उसकी भाषा होती है। भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि वह संस्कृति, परंपरा, इतिहास और सामूहिक चेतना की वाहक होती है। जब किसी भाषा की उपेक्षा होती है, तो दरअसल उस समाज की अस्मिता पर प्रश्नचिह्न लग जाता […]
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