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युवाओं की स्थिति और दुविधाएँ
राजनीति

युवाओं की हालत: आज की पीढ़ी का द्वंद्व और अनिश्चितता का सच

आज का युवा न तो पूरी तरह अपने पिता से कदम-से-कदम मिला पा रहा है और न ही पूरी तरह अपने बेटे से मिला पाएगा। वह बीच में फँस गया है, जैसे कोई समुद्र के बीचों-बीच फँस जाए। न तो वह मछली की तरह समुद्र के अंदर जा सकता है और न ही इंसानों की […]

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राजनीति

क्या मेडिकल कॉलेज शिक्षा के मंदिर हैं या छात्रों की प्रताड़ना के केंद्र? MBBS छात्रों के गंभीर आरोपों ने खड़े किए बड़े सवाल

MBBS छात्रों का फूटा आक्रोश: दादा के निधन पर भी छुट्टी नहीं, हॉस्टल बना ‘जेल’, आखिर कब जागेगा सिस्टम? लेखक: विनय श्रीवास्तव देश में डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप माना जाता है। लेकिन एक सवाल आज पूरे समाज के सामने खड़ा है—जो संस्थान भविष्य के डॉक्टर तैयार कर रहे हैं, यदि वहीं छात्रों के

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हिन्दी महाकाव्य दृश्य संकलन
अध्यात्म

क्या विचारों में राम और बुद्धि में कृष्ण ही आज के समय में सफल जीवन जीने की सबसे बड़ी साधना है?

राम की करुणा और कृष्ण की नीति — क्या यही है कलियुग का संतुलित धर्म ? भारत की आध्यात्मिक परंपरा ने संसार को केवल पूजा-पद्धति नहीं दी, बल्कि जीवन जीने की ऐसी कला दी है, जो हर युग में मनुष्य का मार्गदर्शन करती रही है। जब भी समाज भ्रमित हुआ, जब भी सत्य और असत्य

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राजनीति

आमिर खान की तीसरी शादी-भाग 2 : “मेरी ज़िंदगी, मेरी मर्ज़ी” बनाम “सार्वजनिक जीवन, सार्वजनिक जिम्मेदारी”

आज के दौर में जब भी किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के निजी जीवन पर चर्चा होती है, सबसे पहले एक तर्क सामने आता है—”यह उनकी निजी ज़िंदगी है।” इस तर्क में पर्याप्त सच्चाई भी है। भारतीय संविधान प्रत्येक वयस्क नागरिक को अपनी पसंद से जीवन जीने, विवाह करने और अपने व्यक्तिगत निर्णय लेने की स्वतंत्रता देता

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राजनीति

आमिर खान की तीसरी शादी और बदलते “सेलिब्रिटी संस्कार” पर बड़ा सवाल – क्या 61 की उम्र में फिर रिश्तों की तलाश समाज को सही संदेश देती है?

सवाल केवल आमिर खान का नहीं, उस बदलती सोच का है जो समाज के सामने नया आदर्श गढ़ रही है। बॉलीवुड के सुपरस्टार आमिर खान एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह उनकी कोई फिल्म, सामाजिक संदेश या बॉक्स ऑफिस की सफलता नहीं, बल्कि उनका निजी जीवन है। 61 वर्ष की

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केतन हत्याकांड पर आधारित सांकेतिक चित्र, रिश्तों में बढ़ती हिंसा और सामाजिक चिंता
समाज और सच्चाई

केतन हत्याकांड: रिश्तों की बागडोर और हमारी ज़िम्मेदारी — क्या हिंसा नई पीढ़ी के भविष्य को निगल रही है?

रिश्ते केवल दो व्यक्तियों का साथ नहीं होते, बल्कि परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों की नींव भी होते हैं। पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका या जीवनसाथी के बीच विश्वास, सम्मान और संवाद जितना मजबूत होगा, समाज उतना ही स्वस्थ और सुरक्षित बनेगा। लेकिन हाल के वर्षों में जिस प्रकार रिश्तों के नाम पर हत्या, आत्महत्या, धोखा और

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