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राजनीति

जनादेश का अपमान कब तक? हारते ही लोकतंत्र पर सवाल उठाना विपक्ष की खतरनाक प्रवृत्ति

भारतीय लोकतंत्र केवल एक राजनीतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों की आस्था, विश्वास और सहभागिता का जीवंत प्रतीक है। यह वह व्यवस्था है जिसमें देश का एक साधारण नागरिक भी अपनी उंगली पर लगी स्याही के माध्यम से सत्ता की दिशा तय करता है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में चुनाव केवल सरकार बनाने […]

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प्रेरक व्यक्तित्व

किराने की दुकान के छोटे स्टोर रूम से ग्लोबल कंपनी तक: हरेश गोयल की संघर्ष, समर्पण और सफलता की प्रेरक कहानी

किसी ने सच ही कहा है—“अगर इरादे मजबूत हों, तो छोटी सी शुरुआत भी एक दिन बड़ी मंज़िल तक पहुँचा देती है।”यह कहानी ऐसे ही एक इंसान की है, जिसने अभावों में जन्म लिया, संघर्षों में खुद को तराशा और अपने सपनों को मेहनत की रोशनी से सच कर दिखाया। यह कहानी है हरेश गोयल

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प्रेरक व्यक्तित्व

पटना की गलियों से मायानगरी तक: “एक पल का जीना, फिर तो है जाना…” लिखने वाले बॉलीवुड के मशहूर गीतकार और शायर विजय अकेला की अनकही दास्तान

विशेष साक्षात्कार ✍️ विनय श्रीवास्तव (लेखक | ब्लॉगर | स्वतंत्र पत्रकार) ज़िंदगी को जीतने की आरज़ू में यूँ हुआ, ज़िंदगी भी ना मिली और रूह प्यासी हो गई…….विजय अकेला बॉलीवुड के मशहूर गीतकार, शायर और संवेदनशील शब्दों के जादूगर श्री विजय अकेला — एक ऐसा नाम, जिसने अपने अल्फाज़ों से करोड़ों दिलों की धड़कनों को

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राजनीति

दिल्ली की सड़कों पर बिखरा एक बिहारी बेटे का खून

दिल्ली देश की राजधानी है। यह वह शहर है जहां लाखों लोग अपने सपनों को पूरा करने आते हैं। इनमें बड़ी संख्या बिहार के युवाओं की भी होती है, जो अपने परिवार का पेट पालने, मां-बाप के सपनों को पूरा करने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए घर-गांव छोड़कर महानगरों का रुख करते

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राजनीति

जीते जी दूरियां, मरने पर आंसू: रिश्तों की सबसे कड़वी सच्चाई

जीवन बहुत छोटा और अनिश्चित है। कौन कब, कहां और किस पल इस दुनिया को छोड़ जाए, कोई नहीं जानता। इसके बावजूद इंसान अपने अहंकार, व्यस्तता और छोटी-छोटी नाराजगियों में इतना उलझ जाता है कि अपनों के लिए समय ही नहीं निकाल पाता। परिवार, दोस्त, रिश्तेदार—जो लोग कभी हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा होते

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राजनीति

बिहार की नई उम्मीदें : जंगलराज से विकास की नींव तक और अब आत्मनिर्भर बिहार की तलाश

बिहार आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। दो दशकों से अधिक समय तक राज्य की राजनीति और प्रशासन की धुरी रहे नितीश कुमार के लंबे शासनकाल के बाद अब नई राजनीतिक परिस्थितियों में सम्राट चौधरी जैसे नए नेतृत्व से लोगों की अपेक्षाएँ जुड़ रही हैं। यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बिहार की

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