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राजनीति

बंगाल में सत्ता परिवर्तन का नया अध्याय: नंदीग्राम से नवाबगंज तक शुभेंदु अधिकारी के संघर्ष, रणनीति और उदय की कहानी

राजतिलक की करो तैयारी… पश्चिम बंगाल में आ गए  शुभेंदु  अधिकारी! कभी ममता के सबसे भरोसेमंद सिपाही, आज भाजपा के सबसे बड़े बंगाली चेहरे पश्चिम बंगाल की राजनीति में वर्षों बाद ऐसा दृश्य देखने को मिला है, जब सत्ता के गलियारों में “परिवर्तन” केवल नारे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वास्तविकता बन गया। तृणमूल कांग्रेस […]

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राजनीति

सत्ता नहीं मिली तो लोकतंत्र ही गलत? विपक्ष की मानसिकता चिंताजनक

भारतीय लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे जीवंत लोकतंत्र माना जाता है। यहाँ सत्ता का असली मालिक कोई नेता, दल या विचारधारा नहीं, बल्कि देश की जनता होती है। हर चुनाव में करोड़ों मतदाता अपने विवेक, अनुभव और उम्मीदों के आधार पर फैसला सुनाते हैं। यही जनादेश लोकतंत्र की आत्मा होता है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण

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राजनीति

जनादेश का अपमान कब तक? हारते ही लोकतंत्र पर सवाल उठाना विपक्ष की खतरनाक प्रवृत्ति

भारतीय लोकतंत्र केवल एक राजनीतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों की आस्था, विश्वास और सहभागिता का जीवंत प्रतीक है। यह वह व्यवस्था है जिसमें देश का एक साधारण नागरिक भी अपनी उंगली पर लगी स्याही के माध्यम से सत्ता की दिशा तय करता है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में चुनाव केवल सरकार बनाने

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प्रेरक व्यक्तित्व

किराने की दुकान के छोटे स्टोर रूम से ग्लोबल कंपनी तक: हरेश गोयल की संघर्ष, समर्पण और सफलता की प्रेरक कहानी

किसी ने सच ही कहा है—“अगर इरादे मजबूत हों, तो छोटी सी शुरुआत भी एक दिन बड़ी मंज़िल तक पहुँचा देती है।”यह कहानी ऐसे ही एक इंसान की है, जिसने अभावों में जन्म लिया, संघर्षों में खुद को तराशा और अपने सपनों को मेहनत की रोशनी से सच कर दिखाया। यह कहानी है हरेश गोयल

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प्रेरक व्यक्तित्व

पटना की गलियों से मायानगरी तक: “एक पल का जीना, फिर तो है जाना…” लिखने वाले बॉलीवुड के मशहूर गीतकार और शायर विजय अकेला की अनकही दास्तान

विशेष साक्षात्कार ✍️ विनय श्रीवास्तव (लेखक | ब्लॉगर | स्वतंत्र पत्रकार) ज़िंदगी को जीतने की आरज़ू में यूँ हुआ, ज़िंदगी भी ना मिली और रूह प्यासी हो गई…….विजय अकेला बॉलीवुड के मशहूर गीतकार, शायर और संवेदनशील शब्दों के जादूगर श्री विजय अकेला — एक ऐसा नाम, जिसने अपने अल्फाज़ों से करोड़ों दिलों की धड़कनों को

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राजनीति

दिल्ली की सड़कों पर बिखरा एक बिहारी बेटे का खून

दिल्ली देश की राजधानी है। यह वह शहर है जहां लाखों लोग अपने सपनों को पूरा करने आते हैं। इनमें बड़ी संख्या बिहार के युवाओं की भी होती है, जो अपने परिवार का पेट पालने, मां-बाप के सपनों को पूरा करने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए घर-गांव छोड़कर महानगरों का रुख करते

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