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प्रेरक व्यक्तित्व

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दिल्ली की बेटी, ब्रिस्बेन की आवाज़ — जिसने विदेश में भी हिन्दी की लौ जलाए रखी

“जहाँ अन्न-जल लिखा, वहाँ गई — पर देश मन से न गया” कुछ लोग देश छोड़ते हैं, पर देश उन्हें कभी नहीं छोड़ता। ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन शहर में बसी मधु खन्ना ऐसी ही एक असाधारण महिला हैं — जिन्होंने हजारों मील दूर रहकर भी हिन्दी भाषा, भारतीय संस्कृति और अपनी जड़ों से कभी नाता नहीं […]

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दो कमरों के घर से आईएएस तक: संघर्ष, संकल्प और सपनों की अद्भुत कहानी – सोनाली झा

साधारण परिवार की बेटी ने रचा असाधारण इतिहास भारत की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक UPSC Civil Services Examination (संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा) को पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है। हर वर्ष देशभर से लाखों अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन सफलता केवल कुछ ही

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सीमित साधन, असीमित सोच: युवाओं के लिए मिसाल बने राजेश मीना

जब कोई व्यक्ति जीवन की सामान्य राहों को छोड़कर कुछ असाधारण करने का संकल्प लेता है, तब संघर्ष उसके साथी बन जाते हैं और आत्मविश्वास उसका सबसे बड़ा मार्गदर्शक। यह कहानी ऐसे ही एक व्यक्तित्व की है, जिसने अभावों से भरे बचपन को अपनी नियति नहीं बनने दिया, बल्कि उसे अपनी सफलता की नींव बना

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मुकेश अंबानी बनाम अनिल अंबानी: एक विरासत, दो अलग दिशाएँ

भारत के उद्योग जगत में अंबानी परिवार का नाम केवल अपार संपत्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि दूरदृष्टि, जोखिम प्रबंधन और नेतृत्व क्षमता की गाथा भी है। Mukesh Ambani और Anil Ambani—दोनों ही Dhirubhai Ambani की विरासत के उत्तराधिकारी रहे। समान पारिवारिक पृष्ठभूमि, समान संसाधन और समान अवसर होने के बावजूद 2005 के विभाजन के बाद

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भोजपुरी अस्मिता के प्रहरी: अजीत दुबे की संघर्षगाथा

बलिया से दिल्ली तक मातृभाषा के मान-सम्मान के लिए समर्पित एक जीवन हर समाज की आत्मा उसकी भाषा होती है। भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि वह संस्कृति, परंपरा, इतिहास और सामूहिक चेतना की वाहक होती है। जब किसी भाषा की उपेक्षा होती है, तो दरअसल उस समाज की अस्मिता पर प्रश्नचिह्न लग जाता

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‘मन–मोदी’ पुस्तक समीक्षा: विनय श्रीवास्तव की पहली किताब की विश्व पुस्तक मेले तक की प्रेरक यात्रा

जब सपनों ने पहचान से बड़ी उड़ान भरी लेखन केवल शब्दों का संयोजन नहीं होता, वह आत्मा की अभिव्यक्ति होता है। कभी-कभी एक पुस्तक लेखक की पहचान नहीं, बल्कि उसके जीवन की साधना बन जाती है। साहित्य की दुनिया में अक्सर यह माना जाता है कि पाठक पहले लेखक का नाम देखता है, फिर उसकी

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