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Author name: Vinay Shrivastav

विनय श्रीवास्तव लेखक | ब्लॉगर | स्वतंत्र पत्रकार विनय श्रीवास्तव एक प्रतिबद्ध लेखक, ब्लॉगर एवं स्वतंत्र पत्रकार हैं, जो राष्ट्रीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, समसामयिक विषयों और जनजीवन से जुड़े मुद्दों पर गहन शोध-आधारित एवं विश्लेषणात्मक लेखन के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी लेखनी तथ्य, संतुलन और सामाजिक उत्तरदायित्व की मजबूत आधारशिला पर आधारित है। पिछले एक दशक से अधिक समय से उनके लेख विभिन्न राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय समाचार पत्रों, पत्रिकाओं तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं। उन्होंने भारतीय राजनीति, शासन-प्रशासन, सामाजिक परिवर्तन, ग्रामीण भारत, युवा चुनौतियाँ, सांस्कृतिक विमर्श और समकालीन राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर एवं विचारोत्तेजक लेखन किया है। विनय श्रीवास्तव का मानना है कि लेखन केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का साधन और बौद्धिक जिम्मेदारी का दायित्व है। वे अपने लेखों के माध्यम से तथ्यपरक विश्लेषण, स्वस्थ वैचारिक संवाद और राष्ट्रहित की दृष्टि को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि पाठकों में विवेक, जागरूकता और विचारशीलता को सशक्त बनाना है। वर्ष 2026 में उनकी पहली पुस्तक “मन-मोदी” प्रकाशित हुई, जिसका विमोचन नई दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में किया गया। यह पुस्तक भारत के दो प्रधानमंत्रियों—डॉ. मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी—के नेतृत्व काल का सकारात्मक, तथ्याधारित एवं तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें दोनों कार्यकालों की नीतियों, निर्णयों, उपलब्धियों तथा राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उनके प्रभाव का संतुलित अध्ययन किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि समकालीन भारतीय राजनीति को समझने हेतु एक निष्पक्ष, रचनात्मक और विचारपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है। साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले विनय श्रीवास्तव ने संघर्ष, अध्ययन और निरंतर लेखन के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वे सत्य, विवेक और सामाजिक चेतना को केंद्र में रखकर लेखन करते हैं तथा राष्ट्र, समाज और विचार की सकारात्मक दिशा में निरंतर योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह पुस्तक Amazon पर उपलब्ध है: 👉 “मन-मोदी” – विनय श्रीवास्तव https://www.amazon.in/dp/B0G69QT373

राजनीति

“मन–मोदी” पुस्तक : विकसित भारत की साझा सोच का दस्तावेज़

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कुछ ऐसे दौर होते हैं, जो केवल समय की धारा में बहकर नहीं गुजरते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए दिशा और दृष्टि दोनों तय करते हैं। “मन–मोदी” ऐसी ही एक पुस्तक है, जो देश के उन दो महत्वपूर्ण दशकों की कहानी कहती है—एक ऐसा समय जब भारत ने दो

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राजनीति

फ़िरोज़ गांधी की अनकही कहानी (भाग – 5): अंतिम सफर और अमर विरासत

संघर्षों से भरा अंतिम दौर फ़िरोज़ गांधी के जीवन का अंतिम चरण जितना शांत दिखता है, उतना ही भीतर से संघर्षों से भरा हुआ था। एक ओर उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा था, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक जीवन की जिम्मेदारियाँ भी कम नहीं हुई थीं। संसद में उनकी सक्रियता पहले की तरह ही बनी रही,

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राजनीति

फ़िरोज़ गांधी की अनकही कहानी (भाग – 4)

सत्ता के गलियारों में एक अलग पहचान भारतीय राजनीति में अक्सर रिश्तों और पदों के आधार पर पहचान बनाई जाती रही है, लेकिन फ़िरोज़ गांधी उन चुनिंदा नेताओं में थे जिन्होंने अपनी अलग पहचान खुद गढ़ी। संसद में उनकी मौजूदगी केवल एक सांसद के रूप में नहीं, बल्कि एक निर्भीक प्रहरी के रूप में महसूस

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राजनीति

फ़िरोज़ गांधी की अनकही कहानी (भाग – 3)

आज़ादी के बाद नई भूमिका और पहचान की तलाश 1947 में देश आज़ाद हुआ तो हर स्वतंत्रता सेनानी के सामने एक नया प्रश्न खड़ा था—अब आगे क्या? बहुत से लोग सत्ता में आए, कुछ प्रशासन में चले गए और कुछ ने अपने-अपने तरीके से राष्ट्र निर्माण में योगदान देना शुरू किया। फ़िरोज़ गांधी भी इसी

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अध्यात्म

“जीवन-मृत्यु के बीच ठहरा एक जीवन: हरिश राणा और इच्छामृत्यु का आध्यात्मिक सत्य”

भारत के न्यायिक इतिहास में एक ऐसा क्षण आया है, जिसने केवल कानून की सीमाओं को ही नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के शाश्वत रहस्य पर भी गहरी बहस छेड़ दी है। 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरिश राणा को पैसिव इच्छामृत्यु (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की अनुमति देकर एक ऐसा निर्णय दिया, जो संवेदनाओं,

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राजनीति

फ़िरोज़ गांधी की अनकही कहानी (भाग – 2)

स्वतंत्रता आंदोलन, प्रेम और एक साहसी रिश्ते की शुरुआत भाग–1 में हमने देखा कि किस तरह एक पारसी परिवार में जन्मा एक संवेदनशील और जुझारू युवक इलाहाबाद की राजनीतिक धरती पर आकार ले रहा था। अब कहानी उस मोड़ पर पहुँचती है, जहाँ फ़िरोज़ गांधी केवल एक जागरूक युवा नहीं रहते, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के

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