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प्रेरक व्यक्तित्व

🌟 15 साल की उम्र में क्रिकेट का तूफान: “गांव की गलियों से IPL के मैदान तक एक चमत्कारी खिलाड़ी ”वैभव सूर्यवंशी” की कहानी

एक साधारण गांव से असाधारण सफर की शुरुआत “कहानी उस लड़के की है, जिसके पास न बड़े संसाधन थे, न बड़े मंच—लेकिन था तो सिर्फ एक सपना और उसे पूरा करने का जुनून। Vaibhav Suryavanshi ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो एक छोटा सा गांव भी दुनिया जीतने की शुरुआत बन […]

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राजनीति

“मन–मोदी” पुस्तक : विकसित भारत की साझा सोच का दस्तावेज़

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कुछ ऐसे दौर होते हैं, जो केवल समय की धारा में बहकर नहीं गुजरते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए दिशा और दृष्टि दोनों तय करते हैं। “मन–मोदी” ऐसी ही एक पुस्तक है, जो देश के उन दो महत्वपूर्ण दशकों की कहानी कहती है—एक ऐसा समय जब भारत ने दो

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राजनीति

फ़िरोज़ गांधी की अनकही कहानी (भाग – 5): अंतिम सफर और अमर विरासत

संघर्षों से भरा अंतिम दौर फ़िरोज़ गांधी के जीवन का अंतिम चरण जितना शांत दिखता है, उतना ही भीतर से संघर्षों से भरा हुआ था। एक ओर उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा था, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक जीवन की जिम्मेदारियाँ भी कम नहीं हुई थीं। संसद में उनकी सक्रियता पहले की तरह ही बनी रही,

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राजनीति

फ़िरोज़ गांधी की अनकही कहानी (भाग – 4)

सत्ता के गलियारों में एक अलग पहचान भारतीय राजनीति में अक्सर रिश्तों और पदों के आधार पर पहचान बनाई जाती रही है, लेकिन फ़िरोज़ गांधी उन चुनिंदा नेताओं में थे जिन्होंने अपनी अलग पहचान खुद गढ़ी। संसद में उनकी मौजूदगी केवल एक सांसद के रूप में नहीं, बल्कि एक निर्भीक प्रहरी के रूप में महसूस

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राजनीति

फ़िरोज़ गांधी की अनकही कहानी (भाग – 3)

आज़ादी के बाद नई भूमिका और पहचान की तलाश 1947 में देश आज़ाद हुआ तो हर स्वतंत्रता सेनानी के सामने एक नया प्रश्न खड़ा था—अब आगे क्या? बहुत से लोग सत्ता में आए, कुछ प्रशासन में चले गए और कुछ ने अपने-अपने तरीके से राष्ट्र निर्माण में योगदान देना शुरू किया। फ़िरोज़ गांधी भी इसी

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अध्यात्म

“जीवन-मृत्यु के बीच ठहरा एक जीवन: हरिश राणा और इच्छामृत्यु का आध्यात्मिक सत्य”

भारत के न्यायिक इतिहास में एक ऐसा क्षण आया है, जिसने केवल कानून की सीमाओं को ही नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के शाश्वत रहस्य पर भी गहरी बहस छेड़ दी है। 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरिश राणा को पैसिव इच्छामृत्यु (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की अनुमति देकर एक ऐसा निर्णय दिया, जो संवेदनाओं,

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