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राजनीति

मेलोनी को ‘मेलोडी’ पर विपक्ष को मिर्ची क्यों? “टॉफी पर तूफ़ान, मुद्दों पर मौन”:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राएँ अक्सर केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रहतीं, वे एक राजनीतिक संदेश भी बन जाती हैं। कभी किसी विदेशी नेता को गले लगाना चर्चा बनता है, कभी किसी सांस्कृतिक प्रतीक को उपहार देना। इस बार चर्चा का केंद्र बनी एक छोटी-सी टॉफी — “मेलोडी”। इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni को […]

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हरे कृष्णा
अध्यात्म

आपके “परमानेंट अकाउंट” की क्या स्थिति है? आपने अपना अकाउंट देखा क्या ?

मनुष्य अपने जीवन में अनेक प्रकार के अकाउंट बनाता है। कोई बैंक बैलेंस बढ़ाने में लगा है, कोई जमीन-जायदाद जोड़ने में, कोई शोहरत कमाने में। सुबह से लेकर रात तक इंसान भागता रहता है, संघर्ष करता रहता है, योजनाएँ बनाता है, ताकि उसका संसार मजबूत हो सके। लेकिन एक प्रश्न ऐसा है जो शायद हम

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राजनीति

नेताजी तनिक संभल के, पब्लिक सब देख और समझ रही है!

“नेताजी की साइकिल आगे, पीछे दस गाड़ियों की बारात!” देश में इन दिनों एक नया राजनीतिक मौसम चल रहा है। पहले नेता जी के काफिले देखकर जनता को लगता था कि शायद कोई राजा-महाराजा निकल रहे हैं। आगे पायलट गाड़ी, पीछे एस्कॉर्ट, उसके पीछे मीडिया टीम, फिर समर्थकों की एसयूवी, और सबसे आखिर में वह

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प्रेरक व्यक्तित्व

अन्नू कपूर की फिल्म “हमारे बारह” में गीत लिखने वाले वैज्ञानिक, साहित्यकार और गीतकार “डॉ. बब्बन जी” से विनय श्रीवास्तव की विशेष बातचीत

विज्ञान की कठोर दुनिया और साहित्य की कोमल संवेदनाओं को एक साथ जीना हर किसी के बस की बात नहीं होती। लेकिन डॉ. बब्बन जी उन विरले व्यक्तित्वों में से हैं जिन्होंने प्रयोगशाला की गंभीरता के बीच भी शब्दों की गर्माहट को कभी मरने नहीं दिया। एक ओर वे विज्ञान और शोध की दुनिया में

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समाज और सच्चाई

नकल से तैयार हो रही “सफ़ेद कोट” की पीढ़ी: NEET घोटाले ने देश को किस मोड़ पर ला खड़ा किया है?

देश में डॉक्टर को केवल एक पेशा नहीं, बल्कि भरोसे का प्रतीक माना जाता है। जब कोई मरीज जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा होता है, तब परिवार की उम्मीद डॉक्टर पर टिक जाती है। लेकिन NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले ने इसी भरोसे की जड़ों को हिला दिया है। मीडिया रिपोर्टों में CBI

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अध्यात्म

पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) : भक्ति, कृपा और आत्मशुद्धि का दिव्य अवसर (17 मई से 15 जून 2026)

जब स्वयं भगवान ने एक उपेक्षित मास को अपना नाम दिया सनातन धर्म की परंपराओं में प्रत्येक पर्व, व्रत और मास का अपना विशेष महत्व है, किन्तु वर्ष में आने वाला पुरुषोत्तम मास, जिसे अधिक मास भी कहा जाता है, अत्यंत दुर्लभ और दिव्य माना गया है। यह केवल एक कालखंड नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण

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