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प्रेरक व्यक्तित्व

शब्दों के संसार से जीवन की यात्रा तक…

प्रसिद्ध लेखक, व्यंग्यकार, नाटककार, कवि एवं शोधपरक लेखक श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव जी से विशेष बातचीत कुछ बातचीत केवल बातचीत नहीं होतीं। वे हमें स्मृतियों की उन गलियों तक ले जाती हैं, जहाँ बचपन आज भी जीवित रहता है—पिता की उँगली, साइकिल की छोटी-सी सीट, नर्मदा का शांत प्रवाह, मेले-त्योहार, किताबों की खुशबू और जीवन […]

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राजनीति

क्या धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा युवाओं की जीत है, या सरकार, विपक्ष और आंदोलन—तीनों की असली परीक्षा अब शुरू हुई है?

भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबी यही है कि जनता की आवाज़ अंततः सत्ता के गलियारों तक पहुँचती है। यदि किसी बड़े जनदबाव, छात्र आंदोलन और लगातार उठते सवालों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है, तो इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण घटना माना जाएगा। किसी भी मंत्री का पद

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राजनीति

बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी नीरज सिन्हा को अखिल भारतीय कायस्थ महासभा का समर्थन, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनूप श्रीवास्तव ने की अपील

पटना/नई दिल्ली। बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधान आयुक्त, भारत सरकार, डॉ. अनूप कुमार श्रीवास्तव (IRS Retd.) ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी नीरज सिन्हा को अपना समर्थन देने की घोषणा की है।

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राजनीति

कर्मचारी की गलती पर नौकरी खत्म, नेताओं की गलती पर कुर्सी कायम—यह कैसा न्याय?

अजीब देश है हमारा! यहां एक कर्मचारी अगर लगातार सौ काम सही कर दे तो उसे शायद एक औपचारिक-सा “गुड जॉब” मिल जाए। लेकिन गलती से एक-दो काम बिगड़ जाएं तो पूरा मैनेजमेंट ऐसे टूट पड़ता है, जैसे देश की अर्थव्यवस्था उसी कर्मचारी ने बर्बाद कर दी हो। कारण बताओ नोटिस, प्रदर्शन सुधार योजना, बोनस

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राजनीति

जंतर-मंतर: आंदोलन का अड्डा या राजनीति की नई प्रयोगशाला?

दिल्ली का जंतर-मंतर अब केवल विरोध-प्रदर्शन की जगह नहीं रह गया है। ऐसा लगता है जैसे यह लोकतंत्र का स्थायी ‘आंदोलन कार्यालय’ बन चुका है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां कर्मचारी स्थायी हैं, लेकिन मुद्दे बदलते रहते हैं। कभी किसान, कभी छात्र, कभी कर्मचारी, कभी सामाजिक कार्यकर्ता और कभी कोई नया चेहरा—हर कोई अपनी-अपनी

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सामाजिक आंदोलन: चेतावनियाँ और समाधान
राजनीति

छात्रों की आवाज को लाठी से नहीं, संवाद से जवाब दीजिए: मोदी सरकार को याद रखना चाहिए—अन्ना आंदोलन और बाबा रामदेव का आंदोलन भी सत्ता के लिए चेतावनी थे!

देश की शिक्षा व्यवस्था आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां लाखों छात्रों की मेहनत, करोड़ों परिवारों की उम्मीद और सरकार की प्रशासनिक क्षमता—तीनों एक साथ सवालों के घेरे में हैं। नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े पेपर लीक, परीक्षा परिणामों को लेकर उठे विवाद और परीक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही

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