“जीनीयस जनरेशन की ‘लोल’ भाषा”
आज के जेन जी यानी नई पीढ़ी ने जिंदगी को इतना तेज कर दिया है कि अब शब्द भी हांफने लगे हैं। पहले लोग चिट्ठियां लिखते थे, फिर एसएमएस आया और अब तो लगता है कि अक्षरों की छुट्टी कर दी गई है। दो पीढ़ियों के बीच संवाद का अंतर इतना बढ़ गया है कि घर में बेटा मोबाइल पर कुछ लिखता है और पिता उसका अर्थ समझने के लिए गूगल की शरण में पहुंच जाते हैं। प्रसिद्ध लेखक, कवि, साहित्यकार एवं व्यंग्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव जी ने अपने इस लेख में LOL भाषा के बहाने इसी डिजिटल दुनिया की दिलचस्प तस्वीर खींची है। आइए, “जीनीयस जनरेशन की ‘लोल’ भाषा” की इस भाषाई क्रांति पर थोड़ा मुस्कुराएं!

जेन जी ने एक ऐसी भाषा गढ़ी है जिसने व्याकरण नामक चीज को सीधे तौर पर चैलेंज कर दिखाया है। यह भाषा नहीं, एक क्रांति है, जिसे हम ‘जेन जी’ यानि जनरेशन जी की ‘लोल’ भाषा कह सकते हैं। यह भाषा मोबाइल और चैट की दुनिया की वह शॉर्टहैंड है जहां शब्दों का मतलब बदल जाता है, वर्ण विलीन हो जाते हैं और इमोजी एक पूरी वाक्य की भूमिका निभाने लगते हैं। इसे समझने के लिए आपको किसी डिक्शनरी की नहीं, बल्कि संदर्भ के अनुरूप एक विशेष समझ की जरूरत होती है।
इस भाषा का मूल सिद्धांत है ‘जो दिखे सो नहीं, जो लिखे सो है’। मसलन, ‘यू’ ‘आप’ नहीं, ‘तू’ हो जाता है। ‘आर’ ‘हैं’ नहीं, ‘हो’ बन जाता है। और ‘लोल’? अरे भाई, ‘लोल’ तो हंसने की आवाज़ नहीं, जीवन जीने का एक तरीका है! लाफ आउट लाउडली। यह भाषा इतनी लचीली है कि इसमें ‘थैंक्यू’ ‘थेंक्स’ बनता है, फिर ‘थैंक्स’ से ‘टी.एन.एक्स’ और फिर सीधे ‘टी.क्यू’ तक पहुंच जाता है। यानी, जाकी रही भावना जैसी , वह समझे बोली वैसी। शब्दों में अक्षरों का वजन घटता चला जाता है। क्लासिक टेस्ट क्रिकेट, फिफ्टी फिफ्टी, 20 .. 20 से होते हुए इस भाषा में सुपर ओवर बन जाता है। युवाओं की इस भाषा में अक्षरों की बलि चढ़ाना आम बात है। स्वरों को तो जैसे दरबार से निकाल बाहर किया गया है। ‘व्हाट आर यू डूइंग?’ जैसा भद्दा और लंबा वाक्य इस नई भाषा में ‘व्हाट आर यू डूइंग?’ न रहकर ‘वट आर यू डूइंग?’ बन जाता है और फिर धीरे-धीरे ‘वट आर यू डूइन’ और अंततः ‘डूइन वट?’ तक सिमट चुका है। यह एक तरह से भाषा का मिनिमलिज्म है, जहां कम से कम शब्दों में ज्यादा से ज्यादा भाव अभिव्यक्त हो रहे हैं।

रही सही कसर असर दार इमोजी निकाल रहे हैं। इमोजी इस मजेदार भाषा की आत्मा हैं। एक हंसता हुआ चेहरा जिसकी आंखों से आंसू निकल रहे हैं (एल.ओ.एल.) वह खुशी, गम, हैरानी, या फिर सिर्फ ‘यार, मजाक था’ तक का संदेश दे सकता है।
एक लाल दिल (लव) प्यार, दोस्ती, शुभकामना या फिर ‘ओके, बाय’ का इशारा कर सकता है। यह एक अंतरराष्ट्रीय भाषा है जो देश, काल, जाति, धर्म के बंधन तोड़कर सीधे दिल से दिल तक रात बिरात बात पहुंचाती नजर आती है।
इस भाषा ने एक नए प्रकार के सामाजिक वर्ग को जन्म दिया है। वे जो इस कोड को समझते हैं और वे जो नहीं समझते। एक मां का अपने बेटे के मैसेज ‘पी.सी.एम., जी.एन., टी.सी., आई.एल.वाय’ को देखकर हैरान होना और फिर उसे समझने के लिए इंटरनेट की मदद लेना, आज के दौर की एक सामान्य घटना है। ‘पी.सी.एम.’ यानी ‘पेरेंटल कंट्रोल मच’, ‘जी.एन.’ यानी ‘गुड नाइट’, ‘टी.सी.’ यानी ‘टेक केयर’ और ‘आई.एल.वाय’ यानी ‘आई लव यू’। यह एक छोटा सा संदेश एक पूरी भावनात्मक बातचीत को समेटे हुए है। इसके सम्मुख बंद हो चुके मार्स कोड वाला टेलीग्राम पानी भर रहे हैं।
निष्कर्ष के तौर पर, यह ‘लोल’ भाषा महज शब्दों का संक्षिप्तिकरण नहीं है। यह एक सांस्कृतिक बदलाव है, जो तकनीक और समय के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की कोशिश है। युवाओं के पास समय का अभाव हो सकता है, या उनकी आयोडीन नमक सेवन वाली बुद्धि की कुशाग्र समझ का परिणाम हो सकता है । पुरानी पीढ़ी को यह अजीब लगे, लेकिन यह नई पीढ़ी की अपनी मौलिकनपहचान है।
इसलिए अगली बार जब कोई आपको ‘आई.डी.के.’ (आई डोंट नो) लिखे, तो नाराज न हों। बस ‘एस.एम.एच.’ (शेकिंग माय हेड) करते हुए ‘टी.टी.वाय.एल.’ (टॉक टू यू लेटर) लिख दें। क्योंकि अगर आपने इस भाषा का विरोध किया, तो ‘जी.ओ.ए.टी.’ (ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम) जनरेशन आपको ‘टी.एल.डी.आर.’ (टू लॉन्ग, डिड नॉट रीड) कहकर नजरअंदाज कर देगी। और हां, ‘एफ.वाय.आई’ (फॉर यूअर इनफार्मेशन), इस पूरे लेख को पढ़ने के लिए ‘टी.वाय’ (थैंक यू)!
LOL में छिपी पीढ़ियों की कहानी!
विवेक रंजन श्रीवास्तव जी का यह लेख हमें हंसाते-हंसाते सोचने पर मजबूर करता है कि भाषा बदल रही है या हमारी समझ का सॉफ्टवेयर पुराना हो गया है! जेन जी की LOL भाषा में जहां भावनाएं इमोजी में समा जाती हैं, वहीं हमारी पीढ़ी अब भी पूरे वाक्य में हालचाल पूछने की आदी है। हालांकि, नई पीढ़ी को पूरी तरह गलत ठहराना भी उचित नहीं, क्योंकि हर दौर अपनी नई पहचान गढ़ता है। बस, इतना ध्यान रहे कि संक्षिप्त संदेशों के चक्कर में रिश्तों की बातचीत संक्षिप्त न हो जाए। आखिर परिवार में प्यार का जवाब केवल LOL नहीं, कभी दिल से निकले शब्द भी होने चाहिए। बाकी, इस लेख पर मेरी प्रतिक्रिया है—LOL, यानी हंसिए और सोचिए!

विवेक रंजन श्रीवास्तव
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✍️विनय श्रीवास्तव (लेखक | ब्लॉगर | स्वतंत्र पत्रकार)


विनय श्रीवास्तव
लेखक | ब्लॉगर | स्वतंत्र पत्रकार
विनय श्रीवास्तव एक प्रतिबद्ध लेखक, ब्लॉगर एवं स्वतंत्र पत्रकार हैं, जो राष्ट्रीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, समसामयिक विषयों और जनजीवन से जुड़े मुद्दों पर गहन शोध-आधारित एवं विश्लेषणात्मक लेखन के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी लेखनी तथ्य, संतुलन और सामाजिक उत्तरदायित्व की मजबूत आधारशिला पर आधारित है।
पिछले एक दशक से अधिक समय से उनके लेख विभिन्न राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय समाचार पत्रों, पत्रिकाओं तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं। उन्होंने भारतीय राजनीति, शासन-प्रशासन, सामाजिक परिवर्तन, ग्रामीण भारत, युवा चुनौतियाँ, सांस्कृतिक विमर्श और समकालीन राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर एवं विचारोत्तेजक लेखन किया है।
विनय श्रीवास्तव का मानना है कि लेखन केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का साधन और बौद्धिक जिम्मेदारी का दायित्व है। वे अपने लेखों के माध्यम से तथ्यपरक विश्लेषण, स्वस्थ वैचारिक संवाद और राष्ट्रहित की दृष्टि को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि पाठकों में विवेक, जागरूकता और विचारशीलता को सशक्त बनाना है।
वर्ष 2026 में उनकी पहली पुस्तक “मन-मोदी” प्रकाशित हुई, जिसका विमोचन नई दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में किया गया। यह पुस्तक भारत के दो प्रधानमंत्रियों—डॉ. मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी—के नेतृत्व काल का सकारात्मक, तथ्याधारित एवं तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें दोनों कार्यकालों की नीतियों, निर्णयों, उपलब्धियों तथा राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उनके प्रभाव का संतुलित अध्ययन किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि समकालीन भारतीय राजनीति को समझने हेतु एक निष्पक्ष, रचनात्मक और विचारपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है।
साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले विनय श्रीवास्तव ने संघर्ष, अध्ययन और निरंतर लेखन के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वे सत्य, विवेक और सामाजिक चेतना को केंद्र में रखकर लेखन करते हैं तथा राष्ट्र, समाज और विचार की सकारात्मक दिशा में निरंतर योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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