आज जब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने अभूतपूर्व प्रगति की है, तब भी देश में कुछ ऐसे चिकित्सक हैं जो प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से हजारोंलोगों को राहत पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। ऐसे ही एक नाम हैं डॉ. अजय कुमार सिंह, जो पिछले लगभग 25 वर्षों से एक्यूप्रेशर चिकित्सा के क्षेत्र में निरंतर सेवाएं दे रहे हैं। उनकी पहचान केवल एक चिकित्सक के रूप में ही नहीं, बल्कि ऐसे विशेषज्ञ के रूप में भी है जिन्होंने अपने अनुभव और ज्ञान के बल पर हजारों मरीजों को नई उम्मीद दी है।

डॉ. अजय कुमार सिंह का जीवन स्वयं में प्रेरणा की एक मिसाल है। उन्होंने एक प्रतिष्ठित केंद्रीय सरकारी नौकरी (Central Job) को छोड़कर स्वयं को पूर्ण रूप से मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उनका मानना है कि मानव शरीर स्वयं एक अद्भुत मशीन है और यदि उसके प्राकृतिक ऊर्जा बिंदुओं को सही ढंग से सक्रिय किया जाए तो गंभीर से गंभीर समस्याओं में भी आश्चर्यजनक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
अपने 25 वर्षों के अनुभव में डॉ. सिंह ने अनेक ऐसे मरीजों का उपचार किया है जो वर्षों से विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे थे। उनका दावा है कि एक्यूप्रेशर चिकित्सा केवल दर्द से राहत देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को जागृत कर कई जटिल समस्याओं में भी सहायक सिद्ध हो सकती है। यही कारण है कि कई बार होम्योपैथिक और एलोपैथिक चिकित्सा से जुड़े डॉक्टर भी अपने परिवार के सदस्यों की स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए उनसे परामर्श लेने पहुंचते हैं।
डॉ. सिंह अपने जीवन की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताते हैं कि एक बार ट्रेन यात्रा के दौरान उन्होंने एक ऐसी स्थिति देखी जिसने उन्हें स्वयं भी भावुक कर दिया। एक युवती असहनीय दर्द से कराह रही थी। संयोग से ट्रेन में आधुनिक चिकित्सा पद्धति से जुड़े चिकित्सक भी मौजूद थे। उन्होंने युवती को राहत पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन तत्काल कोई विशेष परिणाम नहीं मिला। युवती की पीड़ा लगातार बढ़ती जा रही थी। ऐसी परिस्थिति में डॉ. अजय कुमार सिंह आगे आए। उन्होंने नाड़ी परीक्षण और एक्यूप्रेशर के कुछ विशेष बिंदुओं पर कार्य किया। उनके अनुसार कुछ ही मिनटों के भीतर युवती के दर्द में उल्लेखनीय कमी आने लगी और धीरे-धीरे वह सामान्य महसूस करने लगी। डॉ. सिंह इस घटना को किसी चमत्कार के रूप में नहीं, बल्कि मानव शरीर में मौजूद प्राकृतिक ऊर्जा तंत्र और एक्यूप्रेशर विज्ञान की प्रभावशीलता के उदाहरण के रूप में देखते हैं।
विनय श्रीवास्तव की एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार सिंह से हुई विशेष बातचीत, जिसमें उन्होंने एक्यूप्रेशर चिकित्सा के वैज्ञानिक आधार, विभिन्न बीमारियों में इसकी उपयोगिता और स्वस्थ जीवन के लिए इसके महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
आइए जानते हैं, क्या कहता है एक्यूप्रेशर विज्ञान और किस प्रकार यह शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को सक्रिय करने में सहायक हो सकता है।
एक्यूप्रेशर चिकित्सा क्या है और यह शरीर में किस प्रकार कार्य करता है?
एक्यूप्रेशर चिकित्सा ईश्वर का दिया हुआ एक प्राकृतिक रूप से वरदान है। यह मानव शरीर में विभिन्न प्रकार के बिंदुओं के माध्यम से प्रेशर देकर — जैसे कोई शरीर में प्रॉब्लम आई है, कोई तकलीफ आया है — तो उससे रिलेटेड रिफ्लेक्सोलॉजी पॉइंट पर प्रेशर दिया जाता है, और उस प्रेशर के माध्यम से जो टिश्यू, नर्व्स शिथिलता आई है, उसमें एनर्जी का संचार किया जाता है। कुल मिलाकर एक्यूप्रेशर मतलब एक्यू मीन तेज प्रेशर, मीन दबाव — तेज दबाव देकर उस पॉइंट को एक्टिवेट किया जाता है। एक एनर्जी का संचार होता है जिससे ब्लड सर्कुलेशन नॉर्मल होता है, और जब ब्लड सर्कुलेशन नॉर्मल होता है तो हर दर्द में एक प्रकार से आराम मिलता है। ये ईश्वर का दिया हुआ एक वरदान है।
क्या डायबिटीज़ (Diabetes) के मरीजों को एक्यूप्रेशर से लाभ मिलता है? यदि हाँ, तो किस प्रकार के सुधार देखने को मिलते हैं?
हाँ, डायबिटीज़ के मरीजों को एक्यूप्रेशर से काफी लाभ मिल सकता है। मैं यह नहीं कहूँगा कि केवल एक्यूप्रेशर से डायबिटीज़ पूरी तरह खत्म हो जाती है, लेकिन यह शरीर की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाकर बीमारी को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
हमारे शरीर में अग्न्याशय (Pancreas) से जुड़े कुछ विशेष रिफ्लेक्सोलॉजी पॉइंट होते हैं। इन बिंदुओं पर नियमित और सही तरीके से प्रेशर देने से अग्न्याशय को सक्रिय करने में सहायता मिलती है। इससे शरीर की ऊर्जा संतुलित होती है और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में सहयोग मिलता है।
डायबिटीज़ के मरीजों को अक्सर थकान, हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, घाव देर से भरना और तनाव जैसी समस्याएँ होती हैं। एक्यूप्रेशर ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाकर इन परेशानियों में राहत देने का कार्य करता है। जब रक्त संचार सुधरता है तो शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व सही मात्रा में पहुँचते हैं, जिससे मरीज स्वयं को अधिक ऊर्जावान महसूस करता है।
हालाँकि, मरीजों को अपनी दवाइयाँ और डॉक्टर की सलाह जारी रखनी चाहिए। एक्यूप्रेशर को सहायक चिकित्सा के रूप में अपनाने से अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
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हाई ब्लड प्रेशर (BP) और तनाव जैसी समस्याओं में एक्यूप्रेशर कितना प्रभावी माना जाता है?
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव लगभग हर व्यक्ति की समस्या बन चुका है और यही तनाव आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों को जन्म देता है। एक्यूप्रेशर इस स्थिति में बहुत उपयोगी सिद्ध होता है।
शरीर में ऐसे कई बिंदु होते हैं जो मस्तिष्क, हृदय और तंत्रिका तंत्र से जुड़े होते हैं। जब इन पॉइंट्स पर उचित दबाव दिया जाता है तो शरीर में एक प्रकार की शांति और संतुलन का अनुभव होता है। व्यक्ति का मानसिक तनाव कम होता है, नींद बेहतर आती है और बेचैनी में कमी महसूस होती है।
हाई बीपी के मरीजों में भी एक्यूप्रेशर ब्लड सर्कुलेशन को संतुलित करने और शरीर की तनावग्रस्त स्थिति को कम करने में मदद करता है। कई मरीजों ने नियमित सत्रों के बाद सिरदर्द, घबराहट और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं में सुधार महसूस किया है।
मैं हमेशा कहता हूँ कि एक्यूप्रेशर शरीर और मन दोनों को संतुलित करने वाली प्राकृतिक चिकित्सा है। जब मन शांत रहता है तो शरीर भी स्वस्थ रहने लगता है।
न्यूरो (Neuro) से जुड़ी समस्याएँ जैसे नसों में दर्द, सुन्नपन, माइग्रेन या लकवा आदि में एक्यूप्रेशर की क्या भूमिका है?
न्यूरो से जुड़ी समस्याओं में एक्यूप्रेशर की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। हमारे शरीर की सभी गतिविधियाँ नसों के माध्यम से नियंत्रित होती हैं। जब किसी कारण से नसों में कमजोरी, रुकावट या दबाव उत्पन्न होता है तो दर्द, सुन्नपन, झनझनाहट या अन्य समस्याएँ शुरू हो जाती हैं।
एक्यूप्रेशर में उन विशेष बिंदुओं पर दबाव दिया जाता है जो तंत्रिका तंत्र से जुड़े होते हैं। इससे नसों में ऊर्जा का प्रवाह बेहतर होता है और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। परिणामस्वरूप प्रभावित हिस्से को अधिक पोषण और ऑक्सीजन मिलती है।
माइग्रेन के मरीजों में सिरदर्द की तीव्रता और बार-बार होने वाली समस्या में कमी देखी गई है। वहीं नसों में दर्द और सुन्नपन वाले मरीजों को भी नियमित उपचार से आराम मिल सकता है।
लकवा (Paralysis) के मामलों में भी एक्यूप्रेशर फिजियोथेरेपी और अन्य उपचारों के साथ सहायक भूमिका निभाता है। यह शरीर के निष्क्रिय भागों को सक्रिय करने और रिकवरी की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि ऐसे मामलों में धैर्य और नियमितता बहुत आवश्यक होती है।
ऑर्थोपेडिक (Orthopedic) समस्याएँ जैसे घुटनों का दर्द, कमर दर्द, सर्वाइकल या जोड़ों की परेशानी में मरीजों को कितने समय में फायदा दिखने लगता है?
यह मरीज की बीमारी, उम्र और समस्या की गंभीरता पर निर्भर करता है। कुछ लोगों को पहले ही सत्र के बाद हल्का आराम महसूस होने लगता है, जबकि पुरानी समस्याओं में थोड़ा अधिक समय लग सकता है।
घुटनों का दर्द, कमर दर्द, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस और जोड़ों की समस्याएँ अधिकतर खराब रक्त संचार, मांसपेशियों के तनाव या नसों पर दबाव के कारण बढ़ जाती हैं। एक्यूप्रेशर इन कारणों पर काम करता है।
जब संबंधित बिंदुओं पर दबाव दिया जाता है तो मांसपेशियों का तनाव कम होता है, रक्त संचार बेहतर होता है और शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता सक्रिय होती है। सामान्यतः 5 से 10 सत्रों के भीतर मरीज को स्पष्ट सुधार महसूस होने लगता है।
यदि समस्या कई वर्षों पुरानी है तो नियमित उपचार और जीवनशैली में सुधार के साथ बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
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सामान्य तौर पर एक्यूप्रेशर उपचार में कितना समय लगता है और इसका खर्च लगभग कितना आता है?
एक्यूप्रेशर की एक सामान्य बैठक लगभग 20 मिनट से 45 मिनट तक चल सकती है। यह पूरी तरह मरीज की समस्या और उसकी स्थिति पर निर्भर करता है।
कुछ समस्याओं में कुछ ही सत्र पर्याप्त होते हैं, जबकि पुरानी बीमारियों में कई सप्ताह या महीनों तक नियमित उपचार की आवश्यकता हो सकती है। एक्यूप्रेशर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह बिना दवा और बिना ऑपरेशन की प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है।
खर्च की बात करें तो यह हर शहर, क्लिनिक और चिकित्सक के अनुभव के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। लेकिन अन्य कई चिकित्सा पद्धतियों की तुलना में यह अपेक्षाकृत किफायती मानी जाती है।
मेरा मानना है कि स्वास्थ्य पर किया गया खर्च वास्तव में निवेश होता है। यदि व्यक्ति समय रहते अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखे तो भविष्य में बड़ी समस्याओं और अधिक खर्च से बच सकता है।
आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में लोग स्वस्थ रहने के लिए एक्यूप्रेशर और प्राकृतिक चिकित्सा को अपनी दिनचर्या में कैसे शामिल कर सकते हैं?
आज अधिकांश बीमारियों की जड़ हमारी अनियमित जीवनशैली है। देर रात तक जागना, तनाव, गलत खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी शरीर को धीरे-धीरे कमजोर कर देती है।
यदि व्यक्ति प्रतिदिन 10 से 15 मिनट भी अपने स्वास्थ्य के लिए निकाले तो वह कई बीमारियों से बच सकता है। हाथों, पैरों और हथेलियों में मौजूद महत्वपूर्ण एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर हल्का दबाव देने की आदत डालनी चाहिए। सुबह नंगे पैर घास पर चलना, पर्याप्त पानी पीना, समय पर भोजन करना और नियमित व्यायाम करना भी बहुत लाभदायक होता है।
प्राकृतिक चिकित्सा हमें प्रकृति के करीब रहने की सीख देती है। जितना हम प्राकृतिक जीवनशैली अपनाएँगे, उतना ही हमारा शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान रहेगा।
मैं हमेशा लोगों से कहता हूँ कि बीमारी आने का इंतजार मत कीजिए। स्वास्थ्य की देखभाल आज से शुरू कीजिए। एक्यूप्रेशर केवल उपचार नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की एक सरल और प्राकृतिक कला है।
विनय श्रीवास्तव :
डॉ. अजय जी, आपने बेहद सरल और सहज भाषा में एक्यूप्रेशर चिकित्सा से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। आपसे बातचीत करके वास्तव में बहुत अच्छा लगा। हमें विश्वास है कि इस विशेष साक्षात्कार को पढ़ने के बाद पाठकों में प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और वे अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग बनेंगे। आपके बहुमूल्य समय और मार्गदर्शन के लिए हार्दिक धन्यवाद।
डॉ. अजय कुमार सिंह :
धन्यवाद विनय जी। मुझे भी आपसे बातचीत करके अत्यंत प्रसन्नता हुई। आपने केवल चिकित्सा से जुड़े सामान्य प्रश्न ही नहीं पूछे, बल्कि उन विषयों को भी शामिल किया जो सीधे आम जनता की जिज्ञासाओं और समस्याओं से जुड़े हैं। अक्सर ऐसे महत्वपूर्ण प्रश्न साक्षात्कारों में छूट जाते हैं, लेकिन आपने उन्हें गंभीरता से सामने रखा। आशा करता हूँ कि यह संवाद लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति जागरूक करेगा और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। आपके vinayvimarsh.org के सभी पाठकों को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ। बहुत-बहुत धन्यवाद।
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विनय श्रीवास्तव
लेखक | ब्लॉगर | स्वतंत्र पत्रकार
विनय श्रीवास्तव एक प्रतिबद्ध लेखक, ब्लॉगर एवं स्वतंत्र पत्रकार हैं, जो राष्ट्रीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, समसामयिक विषयों और जनजीवन से जुड़े मुद्दों पर गहन शोध-आधारित एवं विश्लेषणात्मक लेखन के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी लेखनी तथ्य, संतुलन और सामाजिक उत्तरदायित्व की मजबूत आधारशिला पर आधारित है।
पिछले एक दशक से अधिक समय से उनके लेख विभिन्न राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय समाचार पत्रों, पत्रिकाओं तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं। उन्होंने भारतीय राजनीति, शासन-प्रशासन, सामाजिक परिवर्तन, ग्रामीण भारत, युवा चुनौतियाँ, सांस्कृतिक विमर्श और समकालीन राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर एवं विचारोत्तेजक लेखन किया है।
विनय श्रीवास्तव का मानना है कि लेखन केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का साधन और बौद्धिक जिम्मेदारी का दायित्व है। वे अपने लेखों के माध्यम से तथ्यपरक विश्लेषण, स्वस्थ वैचारिक संवाद और राष्ट्रहित की दृष्टि को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि पाठकों में विवेक, जागरूकता और विचारशीलता को सशक्त बनाना है।
वर्ष 2026 में उनकी पहली पुस्तक “मन-मोदी” प्रकाशित हुई, जिसका विमोचन नई दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में किया गया। यह पुस्तक भारत के दो प्रधानमंत्रियों—डॉ. मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी—के नेतृत्व काल का सकारात्मक, तथ्याधारित एवं तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें दोनों कार्यकालों की नीतियों, निर्णयों, उपलब्धियों तथा राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उनके प्रभाव का संतुलित अध्ययन किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि समकालीन भारतीय राजनीति को समझने हेतु एक निष्पक्ष, रचनात्मक और विचारपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है।
साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले विनय श्रीवास्तव ने संघर्ष, अध्ययन और निरंतर लेखन के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वे सत्य, विवेक और सामाजिक चेतना को केंद्र में रखकर लेखन करते हैं तथा राष्ट्र, समाज और विचार की सकारात्मक दिशा में निरंतर योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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