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भक्ति और संस्कृति का दिव्य संगम: “दरबार लिंगराज का” और “करूं अर्जी मेरी मैया” का भव्य विमोचन

भुवनेश्वर। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के पावन अवसर पर जब पूरा देश विज्ञान और शोध की उपलब्धियों का स्मरण कर रहा था, उसी समय ओडिशा की धरती पर आध्यात्म और संगीत का एक अद्भुत संगम साकार हुआ। भौतिकी संस्थान, भुवनेश्वर के गरिमामय सभागार में भोजपुर दर्शन चैनल द्वारा प्रस्तुत दो दिव्य भजनों—“दरबार लिंगराज का” और “करूं अर्जी मेरी मैया” (मां समलेश्वरी)—का भव्य विमोचन संपन्न हुआ। यह अवसर केवल एक संगीत एल्बम के लोकार्पण का नहीं था, बल्कि ओडिशा की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के संकल्प का भी प्रतीक बन गया।

कार्यक्रम का वातावरण श्रद्धा, उल्लास और सांस्कृतिक गौरव से परिपूर्ण था। मंच पर विद्वानों, कलाकारों और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। यह आयोजन इस बात का सशक्त संदेश था कि विज्ञान और आध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि मानव जीवन के संतुलन के दो आधार स्तंभ हैं। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस जैसे अवसर पर भक्ति संगीत का विमोचन इस समन्वय का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भौतिकी संस्थान के निदेशक प्रो करुणाकर नंदा ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह एल्बम ओडिशा की समृद्ध संस्कृति और प्राचीन भक्ति परंपरा का अनुपम उपहार है। उन्होंने कहा कि जिस भूमि पर विज्ञान की गूंज है, वहीं आध्यात्मिक संगीत का यह स्वर एक नई ऊर्जा का संचार करता है। प्रो. नंदा ने भोजपुर दर्शन चैनल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बहुभाषी माध्यमों के जरिए ओडिशा की आध्यात्मिक चेतना को विश्व स्तर तक पहुंचाने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है।

समारोह में प्रो टी सोम, कर्नल बी के पट्टनायक, डॉ के सी पात्र एवं डॉ एम भुइया विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के यांत्रिक युग में भक्ति संगीत ही वह माध्यम है, जो मनुष्य को उसकी जड़ों से जोड़ता है और आंतरिक शांति प्रदान करता है। उन्होंने इस एल्बम को ओडिशा की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

एल्बम का पहला भजन “दरबार लिंगराज का” ओडिशा के आराध्य देव लिंगराज मंदिर की महिमा का भावपूर्ण चित्रण करता है। यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि श्रद्धा की एक जीवंत अभिव्यक्ति है, जिसमें भगवान शिव के इस प्राचीन मंदिर की दिव्यता, वास्तुशिल्प और आध्यात्मिक आभा का सजीव वर्णन किया गया है। इसके गीतकार बीरेंद्र कुमार पांडेय हैं, जिन्होंने शब्दों के माध्यम से भक्ति रस की ऐसी धारा प्रवाहित की है, जो श्रोताओं को सीधे मंदिर प्रांगण की अनुभूति कराती है। सुप्रसिद्ध गायिका ममता दाश की मधुर और भावपूर्ण आवाज ने इस भजन को विशेष ऊंचाई प्रदान की है। उनके स्वर में भक्ति की गहराई और समर्पण का भाव स्पष्ट झलकता है।

दूसरा भजन “करूं अर्जी मेरी मैया” ओडिशा की अधिष्ठात्री देवी समलेश्वरी मंदिर की महिमा का हृदयस्पर्शी प्रस्तुतीकरण है। मां समलेश्वरी की आराधना ओडिशा की लोकआस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस भजन के माध्यम से भक्त की करुण पुकार, विश्वास और मातृ शक्ति के प्रति अटूट श्रद्धा को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इसके गीतकार पप्पू गौतम हैं, जिनकी लेखनी में भक्ति और भावनाओं का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। इस गीत की रचना में भक्त और देवी के बीच आत्मीय संवाद की अनुभूति होती है।

एल्बम के प्रोडक्शन कंट्रोलर के रूप में सुधांशु दाश ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने संपूर्ण निर्माण प्रक्रिया को कुशलतापूर्वक संचालित करते हुए यह सुनिश्चित किया कि हर पक्ष उत्कृष्टता के मानकों पर खरा उतरे। एल्बम के प्रस्तुतकर्ता किसलय उत्कर्ष एवं उज्जवल उत्कर्ष हैं, जिनके प्रयासों से यह संगीतमय कृति साकार हो सकी। वीडियो संपादन का दायित्व कुमार शानू ने निभाया, जिन्होंने दृश्य और संगीत के समन्वय को प्रभावशाली रूप दिया। इस संपूर्ण सृजन के प्रेरणा स्रोत राजेश तिवारी रहे, जिनकी दूरदृष्टि और समर्पण ने इस परियोजना को मूर्त रूप प्रदान किया।

विमोचन उपरांत प्रो. करुणाकर नंदा एवं अन्य अतिथियों को श्री राजेश तिवारी द्वारा अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही एल्बम से जुड़े कलाकारों—ममता दाश, किसलय उत्कर्ष, कुमार शानू, सुधांशु दाश एवं राजेश तिवारी—को भी अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल उनकी प्रतिभा का आदर था, बल्कि भक्ति और संस्कृति के प्रति उनके समर्पण का भी अभिनंदन था।

कार्यक्रम का सशक्त मंच संचालन अविनाश दाश ने किया। उन्होंने अपने प्रभावशाली शब्दों और संतुलित प्रस्तुति से कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा। धन्यवाद ज्ञापन भगवान बेहरा ने प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, कलाकारों और उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया।

सन् 2001 से सेवारत भोजपुर दर्शन चैनल साहित्य, संस्कृति, धरोहर और भक्ति के प्रचार-प्रसार में निरंतर सक्रिय है। इस चैनल का उद्देश्य केवल मनोरंजन प्रदान करना नहीं, बल्कि भारतीय परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। यह नवीन एल्बम ओडिशा की पुण्यभूमि और महाप्रभु जगन्नाथ की महिमा का भी स्मरण कराता है। हिंदी के साथ-साथ ओड़िया और संबलपुरी भाषा में भजनों को प्रस्तुत करने का प्रयास यह दर्शाता है कि यह परियोजना सांस्कृतिक एकता और भाषाई समन्वय का भी संदेश देती है।

यह आयोजन इस सत्य को पुनः स्थापित करता है कि संगीत केवल स्वर और ताल का संयोजन नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति है। जब भक्ति और संस्कृति का ऐसा संगम होता है, तो वह केवल कानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हृदय को स्पंदित करता है और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। “दरबार लिंगराज का” और “करूं अर्जी मेरी मैया” निश्चित ही भक्ति रस में डूबे श्रोताओं के लिए एक अनुपम संगीतमय भेंट सिद्ध होंगे।

ओडिशा की सांस्कृतिक गरिमा, उसकी आध्यात्मिक परंपरा और लोक आस्था को समर्पित यह एल्बम आने वाले समय में भक्ति संगीत की दुनिया में एक विशेष स्थान बनाएगा। यह केवल दो भजनों का संग्रह नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और सांस्कृतिक स्वाभिमान की एक सजीव अभिव्यक्ति है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगी।

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