“जीवन-मृत्यु के बीच ठहरा एक जीवन: हरिश राणा और इच्छामृत्यु का आध्यात्मिक सत्य”

भारत के न्यायिक इतिहास में एक ऐसा क्षण आया है, जिसने केवल कानून की सीमाओं को ही नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के शाश्वत रहस्य पर भी गहरी बहस छेड़ दी है। 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरिश राणा को पैसिव इच्छामृत्यु (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की अनुमति देकर एक ऐसा निर्णय दिया, जो संवेदनाओं, … Continue reading “जीवन-मृत्यु के बीच ठहरा एक जीवन: हरिश राणा और इच्छामृत्यु का आध्यात्मिक सत्य”