जंतर-मंतर: आंदोलन का अड्डा या राजनीति की नई प्रयोगशाला?

दिल्ली का जंतर-मंतर अब केवल विरोध-प्रदर्शन की जगह नहीं रह गया है। ऐसा लगता है जैसे यह लोकतंत्र का स्थायी ‘आंदोलन कार्यालय’ बन चुका है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां कर्मचारी स्थायी हैं, लेकिन मुद्दे बदलते रहते हैं। कभी किसान, कभी छात्र, कभी कर्मचारी, कभी सामाजिक कार्यकर्ता और कभी कोई नया चेहरा—हर कोई अपनी-अपनी … Continue reading जंतर-मंतर: आंदोलन का अड्डा या राजनीति की नई प्रयोगशाला?